कोरोना के कोहराम पर लग नहीं पा रहा विराम


-प्रशासन ने गांवों में शुरू किए कोविड केयर सेंटर
-हर उम्र के लोग आ रहे चपेट में

By: Deepak Vyas

Published: 09 May 2021, 10:08 AM IST

जैसलमेर. क्षेत्रफल के विस्तार और कम आबादी के चलते कोरोना की पहली लहर में देश-प्रदेश के अन्य हिस्सों की तुलना में राहत वाली स्थिति में रहे जैसलमेर जिले के बाशिंदे दूसरी लहर के पीक में बुरी तरह से जकड़ते जा रहे हैं। रोजाना सैकड़ों की तादाद में संक्रमितों के मिलने और शहर से गांवों तक कोरोना का फैलाव होने से जिम्मेदारों की चिंता बहुत बढ़ गई है। इस बार बच्चों से लेकर युवा और प्रौढ़-बुजुर्ग प्रत्येक आयु वर्ग के लोग महामारी की चपेट में आ रहे हैं। पिछले महज एक पखवाड़े में ही पांच हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। प्रशासन के साथ चिकित्सक विभाग के जिम्मेदारों व कार्मिकों की पेशानियों पर इससे बल पड़ गए हैं। दूसरी तरफ गांवों में संक्रमित रहने के दौरान लोगों के होम आइसोलेशन के नियमों की पालना नहीं करने से समस्या इतनी विकराल हुई है। गांवों में इस समस्या के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय में कोविड केयर सेंटर की स्थापना करने का कदम उठाया है। जहां संक्रमितों को रखकर उनका आवश्यक उपचार किया जाएगा।
205 केंद्रों की स्थापना
जिले में हल्के अथवा बिना लक्षण वाले संक्रमितों को उनके घर में आइसोलेट रहने का चिकित्सकीय परामर्श दिया गया था। इस बीच प्रशासन तक ग्रामीण क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों व अन्य लोगों ने यह तथ्य पहुंचाया कि गांवों में आइसोलेट किए गए लोग सही ढंग से कोविड प्रोटोकॉल की पालना नहीं कर रहे हैं। इसके मद्देनजर जिला कलक्टर आशीष मोदी ने प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर कोविड केयर सेंटर की स्थापना करने का निर्णय लिया। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नारायणसिंह चारण ने जिले की सभी सात पंचायत समितियों की 205 ग्राम पंचायतों के मुख्यालय पर अवस्थित राजकीय विद्यालयों पर कोविड सेंटर स्थापित करते हुए संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों अथवा प्रधानाध्यापकों को उनका प्रभारी अधिकारी बनाया है। उनके सहयोग के लिए ग्राम विकास अधिकारी को सहप्रभारी बनाया गया है। इस संबंध में उन्हें कहा गया है कि जरूरत पडऩे पर वे पुलिस बीट कांस्टेबल का सहयोग प्राप्त करें। प्रत्येक सेंटर में गांव की जनसंख्या के अनुपात में 10 से 30 बैड्स की व्यवस्था की जाएगी। सेंटर में भोजन.पानीए साफ.सफाई आदि की व्यवस्था संबंधित ग्राम पंचायत के जिम्मे होगी।
यह भी समस्या आ रही सामने
पत्रिका पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि कोरोना जांच करवाने वाले कुछ लोग गलत मोबाइल नम्बर दर्ज करवा देते हैं। यह समस्या शहर के साथ कई गांवों में संबंधित कार्मिकों को झेलनी पड़ रही है। इससे पॉजिटिव आने वाले व्यक्ति तक पहुंचने में कठिनाई आती है और कुछ मामलों में गलत नाम.पते तक दर्ज करवाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में फिल्ड स्तर के सरकारी कार्मिक परेशान होते रहते हैं।

फैक्ट फाइल
-09 हजार के पास पहुंचा कुल आंकड़ा
-05 हजार से ज्यादा एक्टिव केस
-25 से 35 प्रतिशत पॉजिटिविटी दर
-15 प्रतिशत ही रिकवर हो पाए

Deepak Vyas Bureau Incharge
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