सरहद से लेकर सोशल साइट्स तक 'गिद्ध नजरें

- हैकर्स की नजरें अब पुलिस की सोशल आइडी पर
- सरहदी क्षेत्रों में सोशल मीडिया पर नजरें गड़ाएं बैठे साइबर ठग
-पुलिसकर्मियों की सोशल साइट्स हैक होने के सामने आ रहे मामले
-जासूसी की स्लीपर सेल की कडिय़ां भी पूर्व में हो चुकी है उजागर

By: Deepak Vyas

Published: 02 Mar 2021, 08:41 PM IST


जैसलमेर/पोकरण. सरहद पर ना'पाक नजरें से आहत जिले के बाशिंदों की परेशानी आए दिए सोशल साइट्स के हैक होने से बढ़ रही है। अब साइबर ठगों के निशाने पर है पुलिस महकमा। गौरतलब है कि पोकरण क्षेत्र में जासूसी की विषबेल के फलने-फूलने की जानकारी पूर्व में सामने आ चुकी है। अब इसी क्षेत्र के आमजन के साथ पुलिस महकमे के कार्मिकोंक की भी सोशल साइट्स हैक होने की जानकारी सामने आ रही है। जानकारों की मानें तो पुलिसकर्मियों व आमजन की फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया एप्प को हैक कर जानकारी जुटाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी तरह सोशल साइट्स पर संबंधित व्यक्ति के मित्रों को मैसेज भेजकर रुपए भी जुटाए जा रहे है। गत एक वर्ष में ऐसे कई मामले सामने आने के बाद सीमावर्ती जिले में हड़कंप मचा हुआ है।
सोशल साइट्स पर काली नजर क्यों
गौरतलब है कि फेसबुक जैसी सोशल साइट्स आम व्यक्ति के जीवन से जुड़ चुकी है। आमजन फेसबुक का उपयोग करता है तथा दोस्तों के साथ पार्टी हो, खुशनुमा पल हो या कोई गम की दास्तां, प्रत्येक गतिविधि फेसबुक पर अपडेट करता है। ऐसे में हैकर्स इन सोशल साइट्स के माध्यम से लोगों को ठगी का शिकार बना रहे है। बीते एक वर्ष में फेसबुक आईडी को हैक करने व आईडी में जुड़े मित्रों को मैसेज भेजकर रुपए एंठने की वारदातें बढ़ चुकी है। यही नहीं कई पुलिसकर्मियों की आईडी भी हैकर्स से बच नहीं पाई है। उनकी आईडी को हैक करने तथा मित्रों से रुपए मांगने के मामले सामने आ चुके है।
यूं चलता है ठगी का कारोबार
हैकर्स किसी भी फेसबुक आईडी के पासवर्ड बदलकर उसकी प्रोफाइल में प्रवेश करते है। इसके बाद फेसबुक के मैसेंजर से जिस व्यक्ति से कई बार बात हो चुकी है, उन्हें मैसेज भेजे जाते है। इन मैसेज में भावनात्मक रूप दिया जाता है तथा रुपए की मांग की जाती है। सामने वाला व्यक्ति को यह जानकारी नहीं हो पाती है कि मैसेज उसका मित्र कर रहा है या हैकर्स। ऐसे में वह अपने मैंसेजर पर आए मैसेज को आधार मानकर उनके बताए नंबर पर रुपए भेज देते है। जब उन्हें जानकारी होती है कि रुपए उनके मित्र ने नहीं, किसी और ने मांगे है तथा फेसबुक आईडी हैक हो चुकी है, तो मात्र पछतावे केे अलावा कुछ नहीं रहता है।
पुलिसकर्मियों की आईडी हैक होने से बढ़ी चिंता
जैसलमेर जिले में विशेष रूप से पोकरण व लाठी क्षेत्र में आए दिन फेसबुक आईडी हैक होने की जानकारी मिल रही है, जिनमें कई पुलिसकर्मी भी शामिल है। कई पुलिसकर्मियों की आईडी हैक कर ली जाती है, तो कई पुलिसकर्मियों के नाम से नई आईडी बनाकर उनके फोटो डाल दिए जाते है। जिसके बाद लोगों से ठगी की वारदात की जाती है।
यह है हकीकत
छह महिने में हो चुकी आधा दर्जन से अधिक वारदातेंं
- गत छह महिनोंं में आधा दर्जन से अधिक फेसबुक आईडी हैक की वारदातेंं हो चुकी है।
- 11 जनवरी 2021 को लाठी क्षेत्र के सेवानिवृत सहायक उपनिरीक्षक देवीसिंह की फेसबुक आईडी हैक की गई।
- 4 नवंबर 2020 को लाठी गांव में चाय की दुकान चलाने वाले तोलाराम पालीवाल की फेसबुक आईडी हेक की गई।
- 13 अक्टूबर 2020 को भादरिया के रावलसिंह भाटी की फेसबुक आईडी पर हैकर्स ने निगाह डाली।
- 2 अक्टूबर 2020 को सोढ़ाकोर के किसान लूणसिंह भाटी की फेसबुक आईडी हैक हुई।
- 23 सितंबर 2020 को 104 ए बुलेंस चालक कैलाश विश्रोई की आईडी हैक की गई।
- लाठी थाने के कांस्टेबल प्रहलाद मीणा की फेसबुक आईडी भी हैकर्स ने हैक की ।
पोकरण सीआई के नाम से फर्जी आईडी
फेसबुक आईडी को हैक कर रुपए मांगने की वारदातों के बीच लोगों के नाम व फोटो जोड़कर नई आईडी बनाने की वारदातें भी सामने आ रही है। पूर्व में ऐसी कई वारदातें हो चुकी है। जिसकेे अंतर्गत रविवार को पोकरण के थानाधिकारी माणकराम विश्रोई के नाम से नई फेसबुक आईडी बनाई गई, जिसके प्रोफाइल में उनका फोटो व सभी जानकारियां भरी गई। थानाधिकारी विश्रोई ने इस संबंध में अपने सभी मित्रों को सचेत रहने व गलत व्यक्ति की ओर से बनाई गई आईडी से रुपए मांगने पर नहीं भेजने की अपील भी की है।

Deepak Vyas Bureau Incharge
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