राजस्थान के बच्चों के लिए ख्वाब बनीं स्मार्ट क्लास, 6 महीने बाद भी पूरा नहीं हुआ स्कूलों को उत्कृष्ट बनाने का काम

सरकारी विद्यालयों के शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने के लिए चलाई जा रही उत्कृष्ट विद्यालय योजना धरातल पर ही मात खा रही है।

By: Hari Singh gujar

Updated: 11 Dec 2017, 06:22 PM IST

सरकारी विद्यालयों के शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने के लिए चलाई जा रही उत्कृष्ट विद्यालय योजना धरातल पर ही मात खा रही है। झालावाड़ में 250 विद्यालयों में से 100 में आधारभूत संरचना तैयार हुई है। जबकि 150 तैयार करने में अभी विफल रहे हैं। इसके चलते शालादर्शन पोर्टल पर तस्वीर धुंधली सी नजर आ रही है। जबकि दूसरे चरण को पूरे होने में मात्र साढ़े तीन महीने शेष बच्चे हैं।

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खेलने के लिए नहीं है जगह

उत्कृष्ट विद्यालयों में अच्छे खिलाड़ी तैयार करने के लिए मैदान तक नहीं हैं। ऐसे में बच्चों को शारीरिक रूप से फिट रखने के लिए खेल मैदान जरुरी है। इसमें 250 में से 213 स्कूलों में ही खेल मैदान के लिए जमीन है। लेकिन कई में अभी खेल मैदान नहीं बन पाए है। वहीं 37 विद्यालय तो ऐसे है जिनमें विभाग को अभी जमीन का आवंटन करवाना है। ऐसे में इनमें क्या 31 मार्च तक मैदान तैयार हो पाएंगे। यह कहना मुश्किल होगा। वहीं 231 स्कूलों में ही चारदीवारी है। वहीं शेष 19 स्कूलों में चारदीवारी नहीं है। इसके चलते आए दिन जानवरों का जमावड़ा लगा रहा रहता है। इससे स्कूल परिसर भी गंदा होता है।

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6 महीने बाद भी नहीं हुआ काम पूरा

उत्कृष्ट विद्यालयों को पूरी तरह से विकसित करने के लिए समय सीमा भी तय की हुई है। प्रथम चरण में बने विद्यालयों को 31 मार्च 2017 तक पूर्ण रुप से विकसित किया जाना था। जबकि अभी तक सभी सुविधाएं पूरी नहीं हुई है। अब द्वितीय चरण में घोषित विद्यालयों में 31 मार्च 2018 तक सभी विद्यालयों को उत्कृष्ट के रूप में विकसित करना है। लेकिन विभाग की कछुआ चाल से विद्यालय नहीं संवर पा रहे हैं। वहीं असनावर व रटलाई ग्राम पंचातयों में ग्राम पंचायत स्तर पर कोई भी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय नहीं होने से यहां उत्कृष्ट विद्यालय का चयन नहीं किया गया है। जिले में प्रथम चरण में 75 तथा द्वितीय चरण में प्रारम्भिक शिक्षा के 175 विद्यालयों का चयन किया गया है।

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उत्कृष्ट स्कूल में यह होनी चाहिए सुविधाएं

जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारम्भिक शिक्षा, झालावाड़ गंगाधर मीणा बताते हैं कि स्कूलों को उत्कृट बनाने के लिए काम चल रहा है। इन स्कूलों में बच्चें के लिए खेल मैदान,नामांकन के आधार पर शौचालय व मूत्रालय,बैठने के लिए पर्याप्त कक्षा कक्ष, ई-लर्निंग के लिए कम्प्यूटर लेब, विद्यालय के चार दीवारी, बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर चाइल्ड फ्रेंडली कक्ष बनाना व दीवारों पर छोटे बच्चों के लिए चित्रकारी आदि ,प्रत्येक विद्यालय में पुस्तकालय बनाए जाने हैं।

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बात डिजीटल की स्कूलों में कम्प्यूटर तक नहीं

सरकार भले ही हर जगह डिजीटल इंडिया की बात कर रही हो। वहीं जिन स्कूलो को उत्कृष्ट बनाना है, उनमें 97 स्कूलों में अभी तक कम्प्यूटर भी नहीं आ पाए है। ऐसे में स्कूलों कैसे कम्प्यूटर लेब बन पाएगी। वहीं ज्यादातर स्कूलों में अभी फर्नीचर भी नहीं आया है। झालावाड़ जिले के अकलेरा ब्लॉक में 31, भवानीमंडी में 27, झालरापाटन में 28, मनोहरथाना में 26, बकानी में 24, खानपुर में 38 और सुनेल में 44 स्कूलों को उत्कृष्ट स्कूल बनाया जाना है।

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