भालता (झालावाड़). हाल ही प्रदेश भर में करीब दो हजार चिकित्सकों को नियुक्ति दी गई। झालावाड़ जिले को भी 15 चिकित्सक मिले लेकिन भालता अब डॉक्टर के इंतजार में है। एक ओर जहां राज्य सरकार गांव गांव में बेहतर चिकित्सा के दावे कर रही है। वहीं जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते कस्बे की पीएचसी में लम्बे समय से चिकित्सक का पद रिक्त होने से मरीजों को कंपाउंडर से इलाज कराना पड़ रहा है। या फिर लिए अकलेरा रटलाई व जिला मुख्यालय जाना पड़ रहा है।
भालता में चिकित्सक का पद रिक्त होने से पिछले डेढ़ वर्ष से कस्बे व क्षेत्र की 5 पंचायतों के करीब 40 गांवों के लोगों की सेहत कंपाउंडरों के भरोसे ही चल रही है। जानकारी के अनुसार पूर्व में यह पीएचसी पीपीपी मोड़ पर संचालित हो रही थी। बाद में पीपीपी मोड़ हटने के बाद सरकार के अधीन हो गई। तब से ही यहां तैनात चिकित्सक को अन्यत्र लगा देने के कारण आज भी चिकित्सक का इंतजार है। ग्रामीण अंचल की पीएचसी में चिकित्सक न होने से मजबूरन दूरदराज जाकर इलाज करवाना पड़ रहा है।