scriptasha meena dhigal jhunjhunu | Video नौकरी नहीं लगी तो आशा ने खुद का बिजनेस शुरू किया, अब दे रही रोजगार | Patrika News

Video नौकरी नहीं लगी तो आशा ने खुद का बिजनेस शुरू किया, अब दे रही रोजगार

locationझुंझुनूPublished: Dec 26, 2023 12:32:39 pm

Submitted by:

Rajesh sharma

राजस्थान के ढिगाल गांव की आशा ने बताया कि वह थोक में कपड़े खरीदती है। फिर खुद डिजाइन करती है। गोटा पत्ती व कढाई का काम समूह की अन्य महिलाओं से करवाती है। इसके बदले प्रत्येक कपड़े को तैयार करने के नग के हिसाब से भुगतान करती है।

Video नौकरी नहीं लगी तो आशा ने खुद का बिजनेस शुरू किया, अब दे रही रोजगार
झुंझुनूं में खुद का बनाया डिजाइनर लहंगा व ब्लाउज दिखाती महिलाएं।
ढिगाल गांव में बने लहंगों, ब्लाउज व चुनरी की मांग जिले के अलावा दिल्ली व मुम्बई में भी बढ़ रही है। हाथ की कारीगरी के चलते यह महंगे तो हैं, लेकिन इनकी बढ़ती बिक्री कई परिवारों को रोजगार दे रही है। गांव की आशा मीणा ने बताया कि उसने बीए तक पढाई कर रखी है। कई साल तो उसने सरकारी नौकरी की तैयारी की। नौकरी में नम्बर नहीं आया तो उसने सोचा कि अब समय बर्बाद करने की बजाय खुद का ही बिजनेस शुरू करूंगी। इसके बाद उसने परिवार व पड़ौस की महिलाओं को जोड़कर स्वयं सहायता समूह बनाया। राजवीका से उत्पादन व मार्केटिंग का प्रशिक्षण लिया। फिर वर्ष 2019 में महिलाओं के कपड़ों की डिजाइनिंग का काम शुरू कर दिया। एक बार मुम्बई में स्वयं सहायता समूह की स्टाल लगी थी, वहां पर वह हाथ से कढाई व गोटा पत्ती वाले लहंगे, चुनरी व ब्लाउज भी प्रदर्शनी के लिए ले गई। वहां उनकी जोरदार मांग रही। अब जब भी मुम्बई, देहरादून व दिल्ली में स्टाल लगती है तो सबसे ज्यादा लहंगे, चुनरी व कढाई के डिजाइनर ब्लाउज की मांग ज्यादा रहती है। अब तो घर से भी लोग उसके कपड़े दूर-दूर शहरों में मंगवाने लगे हैं। इस समूह से दस महिलाए सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है।

खुद करती डिजाइन

आशा ने बताया कि वह थोक में कपड़े खरीदती है। फिर खुद डिजाइन करती है। गोटा पत्ती व कढाई का काम समूह की अन्य महिलाओं से करवाती है। इसके बदले प्रत्येक कपड़े को तैयार करने के नग के हिसाब से भुगतान करती है। पूरा खर्चा निकालने के बाद हर वर्ष लगभग तीन लाख रुपए से ज्यादा की बचत हो जाती है। परिवार की आय बढ़ी है। खुद के बिजनेस में किसी के अधीन नहीं रहना पड़ता है। मैं खुद मर्जी की मालिक हूं। समूह से जुड़ी सुमन ने बताया कि लहंगे के अलावा कढाई के प्लाजो, कढाई के स्कर्ट की भी अच्छी बिक्री हो जाती है।

इनका कहना है
जिले में अनेक समूह हैं जिनकी महिलाएं मेहनत कर खुद का बिजनेस कर रही हैं। ढिगाल की आशा मीणा ने खुद का बिजनेस शुरू किया है। उनके डिजाइन किए हुए लहंगे, ब्लाउज व चुनरी की खूब मांग है। अब जल्द ही महिलाओं को ऑनलाइन प्लेटफार्म उपलब्ध करवाया जाएगा, ताकि वे घर बैठे भी अपने उत्पाद बेच सके।
विपल्व न्यौला, उप निदेशक, महिला अधिकारिता विभाग झुंझुनूं

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