संकट में उद्योग, 80 फीसदी घटा उत्पादन

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए दो महीने तक लगाए गए लॉकडाउन के चलते अंचल का उद्योग जगत खस्ताहाल है। साथ ही छोटे-मोटे काम-धंधे भी इसकी चपेट में आने के कारण अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं।

By: Jitendra

Published: 24 May 2020, 05:00 AM IST

झुंझुनूं. कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए दो महीने तक लगाए गए लॉकडाउन के चलते अंचल का उद्योग जगत खस्ताहाल है। साथ ही छोटे-मोटे काम-धंधे भी इसकी चपेट में आने के कारण अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं। उद्योगों से होने वाला उत्पादन सौ फीसदी से घटकर महज बीस फीसदी रह गया है। वर्तमान में कई उद्योग धंधों की हालत यह है कि इन्हें फिर से शुरू करना मालिकों के लिए गले की फांस बना हुआ है। क्योंकि जिले में इन उद्योगों में अन्य राज्यों बिहार, यूपी, एमपी, हरियाणा समेत अन्य के मजदूर यहां पर काम करते थे और लॉकडाउन के दौरान ये मजदूर यहीं फंसे रहे। परंतु जब जाने की छूट मिली तो अपने परिजनों से मिलने के लिए अपने-अपने राज्यों को लौट गए। जिसके चलते नतीजा यह रहा कि अब इन उद्योगों को चलाने के लिए मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। उद्यमियों की माने तो प्रवासी श्रमिकों को गृह राज्य जाने के बाद काम की तलाश में या तो लौटना होगा या वहां नया रोजगार तलाशना होगा। दरअसल इन दिनों वाहन नहीं मिलने से मजदूर लगातार मानसिक दबाव में आ गए थे और अब साधन मिलते ही अपने घरों को लौट गए। अब वापस लौटने पर बीमारी का डर और फिर 14 दिन तक आइसोलेट के डर के कारण आना नहीं चाहते हैं।

ये उद्योग हैं संचालित....
-क्रेशर इंडस्ट्रीज
-ट्रांसफार्मर व पोल इंडस्ट्रीज
-मार्बल व ग्रेनाइट इंडस्ट्रीज
-मिर्च-मसाला इंडीस्ट्रीज
-हैंडीक्राफ्ट उद्योग
-साबुन, अगरबती, चप्पल-जूते उद्योग
-खिलौने प्रोडक्टस
-ईंट-भट्टा उद्योग
-सीमेंट उद्योग
-आचार उद्योग
-टैक्सटाइल
-इंटरलॉक उद्योग
-ऑटोमोबाइल सेक्टर

सालाना टर्न ओवर 20 करोड़ से अधिक
सबसे ज्यादा सालाना टर्न ओवर क्रेशर, ट्रांसफार्मर, पोल, मार्बल, ग्रेनाइट, मिच-मसाला व सौंप इंडस्ट्रीज के हैं। औसतन इन सभी उद्योगों में क्रेशर को छोड़कर सालाना टर्न ओवर 20 करोड़ के आस-पास है। परंतु वर्तमान में यह घटकर दस फीसदी रह गया है। क्रेशर उद्योग का सालाना टर्न ओवर सौ से सवा करोड़ रुपए के करीब है।

श्रमिकों की समस्या से जूझ रहे हैं उद्योग
लॉकडाउन में ढील दिए जाने के बाद इन उद्योगों को फिर से शुरू किया गया है। परंतु कुटीर उद्योगों को छोड़कर सभी बड़े उद्योगों में मजदूर नहीं हैं। ऐसे में एक निर्धारित आंकड़े में मजदूर नहीं मिल पाने की वजह से उद्योगों को चलाना मुश्किल हो रहा है। जिले में इन उद्योगों में करीब पांच हजार से ज्यादा श्रमिक नियोजित थे। इनमें 90 फीसदी मजदूर अपने राज्य व गांवों में लौट गए।

राजस्थान व हरियाणा में ज्यादा है निर्यात
झुंझुनूं जिले में संचालित इंडस्ट्रीज से बनने वाले उत्पादों का निर्यात ज्यादातर राजस्थान व पड़ौसी राज्य हरियाणा में ही हो रहा है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर बाजार में उत्पाद बेचे जा रहे हैं।

उद्योग संचालकों की जुबानी

नहीं मिल रहे मजदूर
वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या मजदूरों की है। लॉकडाउन लगते ही काम धंधे बंद हो गए। परंतु लॉकडाउन में मजदूर हमारे पास रहे। उन्हें बिना काम धंधे किए हर महीने वेतन देना पड़ा। अब लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद ट्रेन चलते ही मजदूर अपने-अपने राज्यों को लौट गए। अब प्रोडक्शन महज 20 फीसदी रह गया है।
नरेंद्र आबूसरिया, संचालक क्रेशर, पोल व ग्रेनाइट उद्योग (झुंझुनूं)

बसों का संचालन नहीं होने से दिक्कत
मुख्य समस्या मजदूरों की है। साथ ही जितना उत्पादन किया जा रहा है, उन्हें बाजार नहीं मिल रहा है। बसों का संचालन नहीं होने से दिक्कतें आ रही हैं। स्थानीय स्तर के अलावा राजस्थान व हरियाणा में प्रोडक्ट बेचने का काम होता था जो फिलहाल बंद है।
प्रमोद खंडेलिया, लक्ष्मी सौप इंडस्ट्रीज (झुंझुनूं)

प्रवासियों का आवागमन बंद होने से दिक्कत
प्रवासियों के चलते मिठाई उद्योग अच्छा चलता था। परंतु अब सालासर, खाटूश्यामजी समेत अन्य स्थानों से प्रवासियों का आगमन बंद होने के कारण 15 फीसदी मिठाइयों की बिक्री हो रही है। मिठाई उद्योग में मजदूरों की ज्यादा समस्या नहीं है।
सुभाष राव, पेड़ा व्यवसायी

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