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बैंक से 49 लाख रुपए नहीं मिलने का वृद्धा ने किया दावा

- फर्जी चेक से महिला के बैंक खाते से 49 लाख रुपए निकालने का मामला- पुलिस के पैंडेंसी निस्तारण में व्यस्त होने से दो बैंकों के प्रबंधकों पर कानूनी कार्रवाई अटकी

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बैंक से 49 लाख रुपए नहीं मिलने का वृद्धा ने किया दावा

बैंक से 49 लाख रुपए नहीं मिलने का वृद्धा ने किया दावा

जोधपुर. पंजाब नेशनल बैंक के मुम्बई में मैनेजर ने पहले तो जोधपुर की शास्त्रीनगर में पीएनटी सर्किल के पास बैंक की शाखा में एक वृद्धा के खाता नम्बर और उसमें बड़ी राशि होने की जानकारी ठगों को दी। फिर स्थानीय शाखा प्रबंधक ने ग्राहकों के प्रति जिम्मेदारी को ताक पर रख शास्त्रीनगर थाना पुलिस को वृद्धा के बैंक खाते में ब्याज सहित ४९ लाख रुपए लौटाने की झूठी मौखिक जानकारी दे डाली।

बलदेव नगर निवासी पतासीदेवी पत्नी कालूराम प्रजापत ने बताया कि शास्त्रीनगर पीएनटी चौराहे के पास पीएनबी शाखा में बचत खाता है। गत १६ अक्टूबर को फर्जी चेक के जरिए खाते से ४९ लाख रुपए निकाल लिए गए थे। ५ नवम्बर को बैंक में पास बुक की एन्ट्री कराने पर उसे पता लगा था। थाने में एफआइआर दर्ज कराई गई थी। जांच के दौरान बैंक की ओर से पुलिस को अवगत कराया गया कि उन्होंने वृद्ध महिला को ४९ लाख रुपए ब्याज सहित लौटा दिए गए हैं। वृद्धा का कहना है कि बैंक की तरफ से एक रुपया भी नहीं लौटाया गया है। बैंक प्रबंधन की झूठी जानकारी व गैर जिम्मेदाराना रवैये के प्रति वृद्धा की ओर से पीएनबी के उच्चाधिकारियों व आरबीआइ अधिकारियों और पीएमओ को भी ट्विट से बैंक की धोखाधड़ी की शिकायत की गई है।

कठिन परिस्थतियों में कराई पुत्र की शादी
पतासीदेवी का कहना है कि चौहाबो में बिरला स्कूल के पास स्थित मकान ४७ लाख रुपए में बेचा था। राशि बैंक खाते में जमा करा दी थी। ताकि नौ दिसम्बर को पुत्र की शादी धूमधाम से कर सके, लेकिन बैंक के जिम्मेदारों के साथ मिलकर बदमाशों ने फर्जी चेक से ४९ लाख रुपए खाते से निकाल लिए थे। कोरोना से उपजे कठिन हालात और आर्थिक तंगी में बड़ी कठिनाई से पुत्र की शादी करवाई थी।

बैंक जिम्मेदारों ने पुलिस को दी भ्रामक जानकारी
पुलिस का कहना है कि वृद्धा की तरफ से एफआइआर दर्ज होने के बाद बैंक प्रबंधक लिखित शिकायत लेकर थाने पहुंचे थे। बैंक शाखा के जिम्मेदार ने बड़ी लापरवाही के लिए विभागीय स्तर पर उसके खिलाफ होने वाली कार्रवाई से बचने के लिए एफआइआर दर्ज करने का आग्रह किया था। ताकि सेवानिवृत्ति पर मिलने वाले लाभांश से वंचित न रह सके। चूंकि पहले ही मामला दर्ज हो चुका था। इसलिए बैंक की एफआइआर दर्ज नहीं की गई थी। बैंक ने मामले में चूक मानते हुए पुलिस को मौखिक में अवगत कराया था कि वृद्धा को ब्याज सहित पूरी राशि लौटा दी गई है। जबकि एेसा नहीं हुआ था।