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Jodhpur Foundation Day : सूर्यनगरी की ‘शान’ है ये किला, दुनियाभर से आते हैं पर्यटक, जानें इसका इतिहास

Jodhpur Foundation Day : इसकी आकृति मयूर पंख के समान है, इसलिए इसे मयूरध्वज दुर्ग भी कहते हैं।

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Jodhpur Foundation Day : राजस्थान का दूसरा बड़ा शहर और पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा शहर जोधपुर मेहरानगढ़ किले पर अभिमान करता है। देशी-विदेशी पर्यटक खास तौर जोधपुर के ऐतिहासिक किला ही देखने आते हैं। रजवाड़ों की शानो-शौकत और गौरवशाली इतिहास को समेटे ये किला जोधपुरवासियों को गर्व की अनुभूति कराता है। इस दुर्ग के चारों 12 से 17 फुट चौड़ी और 20 से 150 फुट ऊंची दीवार है। किले की चौड़ाई 750 फुट और लम्बाई 1500 फुट रखी गई है।

चार सौ फुट ऊंची पहाड़ी पर स्थित ये विशाल दुर्ग कई किलोमीटर दूर से दिखाई देता है। बरसात के बाद आकाश साफ होने पर इस दुर्ग को कई किलोमीटर दूर से भी देखा जा सकता है। ये मिहिरगढ़ के नाम से जाना जाता था। मिहिर का अर्थ सूर्य होता है। मिहिरगढ़ बाद में मेहरानगढ़ कहलाने लगा। इसकी आकृति मयूर पंख के समान है, इसलिए इसे मयूरध्वज दुर्ग भी कहते हैं। किले में कई पोल व द्वार हैं। लोहापोल, जयपोल और फतहपोल के अलावा गोपाल पोल, भैरू पोल, अमृत पोल, ध्रुवपोल, सूरजपोल आदि छह द्वार किले तक पहुंचने के लिए बनवाए गए हैं। इनका क्रम इस तरह संकड़ा व घुमावदार निश्चित किया गया है जिससे दुश्मन आसानी से दुर्ग में प्रवेश ना कर सकें और उस पर छल से गर्म तेल, तीर व गोलियां चलाई जा सकें। दुर्ग के विभिन्न महलों के प्लास्टर में कौड़ी का पाउडर प्रयुक्त किया गया है, जो सदियां बीत जाने पर भी चमकदार व नवीन दिखाई देता है। श्वेत चिकनी दीवारों, छतों व आंगनों के कारण सभी प्रासाद गर्मियों में ठंडे रहते हैं।

1459 में हुआ था निर्माण

इस किले को 1459 में राव जोधा द्वारा जोधपुर में बनवाया गया था। यह देश के सबसे बड़े किलों में से एक है। मेहरानगढ़ किला, 5 शताब्दियों से भी अधिक समय तक राठौड़ वंश का मुख्यालय रहा। 'मेहरान' का अर्थ सूर्य है इसलिए राठौड़ों ने अपने मुख्य देवता सूर्य के नाम से इस किले को मेहरानगढ़ किले के रूप में नामित किया। किले की वास्तुकला में आप 20 वीं शताब्दी की वास्तुकला की विशेषताओं के साथ 5 वीं शताब्दी की बुनियादी वास्तुकला शैली को भी देख सकते हैं। किले में 68 फीट चौड़ी और 117 फीट लंबी दीवारें है। जोधपुर का किला कई हमलों का शिकार हुआ। इस किले पर कुल 6 हमले हुए। इस किले पर राव बीका, शेरशाह सूरी, अकबर, औरंगजेब, सवाई जयसिंह व जगतसिंह ने हमले किए, लेकिन खुशी की बात यह रही कि इस किले को कोई जीत न सका।

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