अल्पसंख्यक विद्यालयों में संस्कृत की पढ़ाई भगवाकरण की साजिश: सुलेमान

कहा- केंद्र व राज्य सरकार स्कूलों में वंदेमातरम् थोप रही हैं।

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Updated: 10 Feb 2018, 02:24 PM IST

कानपुर. आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के हैदराबाद में शुरू हुए 26वें अधिवेशन में वंदेमातरम् और संस्कृत भी एजेंडे में शामिल हैं। इस अधिवेशन में तीन तलाक पर मोदी सरकार द्वारा काननू बनाने समेत कई मुद्दों पर चर्चा होगी। अधिवेशन में कानपुर से शामिल होने गए बोर्ड के सदस्य मोहम्मद सुलेमान ने संस्कृत और वंदेमातरम् को अनिवार्य करने को भगवाकरण की साजिश बताया। अधिवेशन में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बोर्ड चर्चा करेगा।

बोर्ड का तीन अधिवेशन शुक्रवार को शुरू हुआ। इस संदर्भ में मोहम्मद सुलेमान ने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार और यूपी की योगी सरकार स्कूलों में वंदेमातरम् थोप रही है। केंद्रीय विद्यालयों की इतिहास की पुस्तकों में तथ्य बदले जा रहे हैं। अल्पसंख्यक विद्यालयों में संस्कृत भी पढ़ाई जाएगी। यह भगवाकरण की साजिश है। इसका उद्देश्य भीमराव अंबेडकर के संविधान के साथ छेड़छाड़ करना है। उन्होंने कहा कि संविधान ने सभा को अपने धर्म अनुसार इबादत करने की आजादी दी है, लेकिन अब भगवा एजेंडा लागू करने का प्रयास हो रहा है। पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य ने कहा कि बोर्ड अब सिर्फ मुस्लिमों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमनी इस्लाहे मुआशरा (समाज सुधार) योजना के तहत अब सभी समुदाय के लोगों से भी संपर्क करेगा और उन्हें बताएगा कि इस्लाम क्या है।

शरीयत से छेड़छाड़ बता चुका है

गौरतलब है कि बोर्ड पिछले दस वर्षों से इस्लाहे मुआशरा का अभियान चला रहा है। माडल निकाहनामा बोर्ड पांच साल पहले ही बना चुका है, लेकिन ढिलाई के चलते उसका प्रभाव बहुत अधिक नहीं रहा। ट्रिपल तलाक को बोर्ड पहले ही शरीयत से छेड़छाड़ बता चुका है।

न तो बेचा जा सकता है और न ही गिफ्ट किया जा सकता है

बोर्ड अयोध्या विवाद का हल कोर्ट के बाहर सुलह समझौते से निकालने की श्रीश्री रविशंकर की कोशिशों को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने खारिज कर दिया। बोर्ड की बैठक में पदाधिकारियों ने कहा कि उसे सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही मंजूर होगा। आर्ट ऑफ लिविंग के श्रीश्री रविशंकर ने गुरुवार को मुस्लिम प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। इसमें बोर्ड के सदस्य मौलाना सैयद सलमान हुसैन नदवी ने मस्जिद दूसरी जगह बनाने की राय जाहिर की थी।
बोर्ड के मुताबिक, यह जमीन मस्जिद के लिए है और इसे न तो बेचा जा सकता है और न ही गिफ्ट किया जा सकता है। एक बार मस्जिद को दी गई जमीन अल्लाह की हो जाती है। इस मामले पर समझौते के लिए की गई सभी बातचीत बिना किसी नतीजे की ही खत्म हुई। इस लिए बोर्ड को अब केवल सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही मंजूर होगा।

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