बिन पानी सब सून, दम तोड़ रही शान

बिन पानी सब सून, दम तोड़ रही शान
गुढ़ाचन्द्रजी के भंवरवाड़ा गांव में एक शौचालय में रखा कबाड़ का सामान

Jitendra Sharma | Updated: 23 Sep 2019, 12:33:45 PM (IST) Karauli, Karauli, Rajasthan, India

गुढ़ाचन्द्रजी. गांवों को खुले में शौच मुक्त करने के लिए केन्द्र सरकार की 'स्वच्छ भारत मिशन योजनाÓ पर पानी के अभाव में पानी फिर रहा है। नादौती तहसील की सभी पंचायतों को ओडीएफ घोषित कर सरकार ने वाह वाही लूट ली। लेकिन नादौती तहसील के अधिकांश गांव माड़ क्षेत्र में आते है। जहां पीने का पानी भी आसानी से नहीं मिल पाता है। ऐसे में पानी के अभाव में शौचालय का उपयोग नहीं हो रहा।

पानी बिना कबाड़ बने शौचालय
गुढ़ाचन्द्रजी. गांवों को खुले में शौच मुक्त करने के लिए केन्द्र सरकार की 'स्वच्छ भारत मिशन योजनाÓ पर पानी के अभाव में पानी फिर रहा है। नादौती तहसील की सभी पंचायतों को ओडीएफ घोषित कर सरकार ने वाह वाही लूट ली। लेकिन नादौती तहसील के अधिकांश गांव माड़ क्षेत्र में आते है। जहां पीने का पानी भी आसानी से नहीं मिल पाता है। ऐसे में पानी के अभाव में शौचालय का उपयोग नहीं हो रहा। इसका उदाहरण कि गांवों में अधिकांश शौचालय की छतों पर टंकी ही नहीं रखी है तो कई शौचालय की छत पर रखी टंकी बिना पानी के शोपीस बनी हुई है। कहीं कहीं तो शौचालय कबाड़ भरने के काम आ रहे हैं।
९० फीसदी गांवों में पानी का अभाव
नादौती तहसील में २९ पंचायतों को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। लेकिन ९० फीसदी गांवों में पानी की कमी के चलते बने अधिकांश शौचालय शो-पीस साबित हो रहे है। शौचालय में पानी की व्यवस्था नहीं होने से कई जगह लोग अभी भी खुले में शौच जाते है। लोगों का कहना है कि सरकार के दबाब में विभागीय अधिकारियों ने पंचायतों में आनन-फानन में शौचालयों का निर्माण तो करा दिए, लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं की। पानी के अभाव में शौचालय की टंकियां खाली पड़ी है।
बूंद-बूंद पानी को तरसते लोग
तहसील के अधिकांश गांवों में लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। काफी दूर दूर से पानी लाकर प्यास बुझाते हैं। ऐसे में शौचालय के लिए पानी की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता है। जिससे लोग खुले में ही शौच जाते हैं।
स्नानाघर व कबाड़घर बने शौचालय
ग्रामीण क्षेत्रों में बने अधिकांश शौचालय स्नानाघर व कबाड़घर बनने के साथ स्टोररूम बने हुए है। अधिकांश शौचालयों में लोगों ने शीट को पट्टी से ढककर स्नानाघर व बर्तन धोए जा रहे है। तो कई लोगों ने भूसा, सूखी लकड़ी व कबाड़ का सामान भर रखा है। वही लोगों ने भूसा व अनाज के कट्टे भी भर रखे है।
प्रति व्यक्ति औसतन ५-७ लीटर की जरूरत
शौचालय के लिए प्रत्येक व्यक्ति को औसतन प्रतिदिन ५-७ लीटर पानी की आवश्यकता होती है। यदि परिवार में ५ सदस्य है तो प्रतिदिन कम से कम३० लीटर पानी तो शौचालय के उपयोग के लिए चाहिए। जबकि इतना पानी तो अन्य जरूरतों के लिए ही नहीं मिल पाता है।
ग्रामीण ढहरिया निवासी रामरूप मीना, तिमावा निवासी रामखिलाड़ी मीना, मांचड़ी निवासी सियाराम गुर्जर, हुकम सिंह आदि ने बताया कि पानी के अभाव में शौचालयों का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
(पत्रिका संवाददाता)

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