फर्जी तरीके से जलहरी तालाब की नीलामी कर राशि डकराने वाले सरपंच व समिति अध्यक्ष को जेल

फर्जी तरीके से जलहरी तालाब की नीलामी कर राशि डकराने वाले सरपंच व समिति अध्यक्ष को जेल
Sirpanch and chairman of government land scam

Dharmendra Pandey | Publish: Jun, 02 2019 08:41:12 PM (IST) | Updated: Jun, 02 2019 08:41:13 PM (IST) Katni, Katni, Madhya Pradesh, India

जिले के बहोरीबंद ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम पौड़ी निवासी सरंपच ने ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष के साथ मिलकर तालाब की फर्जी तरीके से नीलामी कर दी। इस दौरान सरपंच ने ग्राम सभा में प्रस्ताव भी पारित नही कराया। फर्जी तरीके से सरकारी तालाब की नीलामी के बारे में जब ग्रामीणों को पता चला तो तहसीलदार बहोरीबंद से शिकायत कर दी। जांच हुई। जिसमें गड़बड़ी पाई गई। जिला सत्र न्यायाधीश ने दो-दो साल की सजा व 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किए जाने का फैसला सुनाया हैं।

 

कटनी. फर्जी तरीके से जलहरी तालाब की नीलामी कर राशि डकारने वाले ग्राम पंचायत सरपंच व समिति अध्यक्ष को जिला सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दो-दो साल की सजा का फैसला सुनाया हैं। 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। अर्थदंड की राशि जमा नही करने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगताए जाने का फैसला सुनाया हैं।

अपर लोक अभियोजक केके पांडे ने बताया कि साल 2017 में बहोरीबंद तहसीलदार रहे नन्हेलाल वर्मा द्वारा एक लिखित शिकायत थाना प्रभारी बहोरीबंद को दी गई। जिसमें कहा कि गया ग्राम पिपरिया स्थित जलहरी तालाब की नीलामी पंचायत स्तर से विधि प्रक्रिया अनुसार किए जाने का प्रावधान है, लेकिन सरपंच मनोज कुमार आदिवासी व समिति अध्यक्ष जागेश्वर प्रसाद पटेल द्वारा प्रक्रिया का पालन नही किया गया। फर्जी तरीके से कागज में तालाब की नीलामी बता दी और मिली हुई रकम को अपने उपयोग में लिया जा रहा है।
सिंघाड़े की खेती के लिए साल 2015 में हुई थी तालाब की नीलामी:
अपर लोक अभियोजक पांडे ने बताया कि साल 2015 में ग्राम पिपरिया निवासी मनोज कुमार आदिवासी बहोरीबंद ब्लॉक की ग्राम पंचायत पौंड़ी का सरपंच था। जागेश्वर प्रसाद पटेल दुर्गा समिति/ ग्राम विकास समिति का अध्यक्ष था। ग्राम पिपरिया स्थित जलहरी तालाब की नीलामी सिंघाड़े की खेती के लिए हुई थी। इस दौरान सरपंच व समिति अध्यक्ष ने राजेंद्र बर्मन से 20 हजार रुपये ले लिए, लेकिन ग्राम सभा में उसका प्रस्ताव पारित नही किया गया और न ही इस संबंध में कोई अभिलेख तैयार किया गया। इधर, ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित नही होने की तहसीलदार से शिकायत हुई। मामले की जांच की गई जिसमें सरपंच व समिति अध्यक्ष दोषी पाया गया। दोनों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर पुलिस ने न्यायालय में पेश किया गया। साक्ष्य के आधार पर सत्र न्यायाधीश ने सरपंच व समिति अध्यक्ष को दोषी ठहराया। धारा 406/34 के तहत दोनों को दो-दो साल की सजा व 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
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