मशरूम की खेती ने बनाया किसान को लखपति

तकनीक के साथ आधुनिक खेती से कम जगह में ज्यादा मुनाफा

-एक हजार वर्गफीट में कर रहा युवा किसान मशरूम की खेती
-साल में चार फसल से हो रही साढ़े तीन लाख की कमाई
-देशभर से किसान सीखने आ रहे आधुनिक खेती, विदेशी भी कर चुके विजिट

खंडवा. आधुनिक और तकनीकी ज्ञान के आधार पर युवा किसान एक हजार वर्गफीट की जगह में मशरूम की खेती से साल में साढ़े तीन लाख रुपए कमा रहा है। छोटे से गांव के युवा किसान मनोज पिता माधव प्रधान ने प्रायोगिक तौर पर मशरूम की खेती को अपनाया और आज देशभर के किसानों के लिए उदाहरण बन चुका है। साल में चार बार मशरूम की फसल लेकर किसान उन्नत खेती को भी बढ़ावा देने का काम कर रहा है।
पुनासा तहसील का ग्राम रीछफल गोराडिय़ा निवासी मनोज प्रधान ने टीकमगढ़ से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई की। वर्ष 2017 में फायनल इयर में उन्होंने मशरूम खेती का ट्रायल किया था। इसके बाद देश के एकमात्र मशरूम रिसर्च सेंटर डीएमआर सोलन हिमाचल प्रदेश से मशरूम खेती की ट्रेनिंग ली। वर्ष 2017 में ही उन्होंने इंदौर में रहकर 10 बाय 20 के कमरे में मशरूम की खेती को प्रयोग के तौर पर अपनाया। यहां आधुनिक तरीके से खेती करने के साथ ही उन्होंने मशरूम उत्पादन का मार्केट भी इंदौर और भोपाल में तैयार किया। 10 बाय 20 के कमरे में दो माह की फसल से उन्हें 20 से 25 हजार रुपए का फायदा हुआ।
गांव पहुंचकर शुरू की खेती
करीब दो साल तक इंदौर में मशरूम की खेती करने और मार्केट तैयार करने के बाद युवा किसान मनोज प्रधान अपने गांव रीछफल लौटे। यहां उनके पिता के पास ढाई एकड़ खेती है, जिसे बंटाई पर देकर वे साल में 50 हजार रुपए कमाते है। युवा किसान ने यहां 10 बाय 20 के पांच कमरे तैयार कर एक हजार वर्गफीट में बटन मशरूम, मिल्की मशरूम ओएस्टर मशरूम की खेती आरंभ की। मशरूम में 25 से 30 तीन में फल आना शुरू होता है और करीब 30 दिन तक उत्पादन मिलता है। मनोज ने बताया कि वे मशरूम को इंदौर और भोपाल सप्लाय करते है। साल में करीब 80 हजार रुपए का खर्च होता है, जिससे 3.50 लाख रुपए का उत्पादन होता है।
साउथ अफ्रीका से भी आए किसान
मशरूम की आधुनिक खेती सीखने के लिए मनोज के फार्म हाउस पर देशभर से किसान आते है। अब तक वे तमिलनाडू, महाराष्ट्र, गुजरात, चैन्ने, राजस्थान के किसानों को ट्रेनिंग दे चुके है। साउथ अफ्रीका से भी किसानों का दल उनके यहां मशरूम की खेती देखने आ चुका है। जिला प्रशासन द्वारा भी उन्हें उन्नत खेती के लिए सम्मानित किया जा चुका है। प्रशासन द्वारा आधुनिक खेती के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी वे ट्रेनिंग दे रहे हैं।

मनीष अरोड़ा Bureau Incharge
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