दीमक ने छीन लिया एमपी से ताजमहल

दुनिया के 7 अजूबों में शामिल प्रेम का प्रतिक ताजमहल के एमपी में न बनने का ये कारण जानकारी आप भी अचंभित हो जाएंगे! मुमताज की 387वीं पुण्यतिथि पर पढिए क्यों नहीं बना ताप्ती किनारे ताजमहल?

बुरहानपुर. शहर की मिट्टी में दीमक नहीं होती तो ताजमहल आज आगरा की यमुना किनारे की बजाय बुरहानपुर में ताप्ती किनारे होता। ताप्ती किनारे की मिट्टी में दीमक के खतरे को भांपकर मुगल सम्राट शाहजहां ने यमुना का तट  चुना। दीमक के कारण यहां ताजमहल का आधार (नींव) बनना नामुमकिन था।
आगरा में रेत-मिट्टी खोदकर शीशम और सागौन की लकडि़यों से बेस बनाकर भव्य ताजमहल की 110 पिलरों पर आधारशिला रखी थी। ताजमहल के लिए भौगोलिक और तकनीकी रूप से खरा नहीं उतरा बुरहानपुर शहर शुक्रवार को हिंदुस्तान की मलिका बेगम मुमताज महल की 387वीं पुण्यतिथि पर उन्हें याद करेगा।



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मुमताज की कब्र को लेकर दो मत

बुरहानपुर के शाही महल में 17 जून 1631 को मुमताज ने चौदहवीं संतान के जन्म के समय अंतिम सांस ली थी। आहूखाना में शव को दफनाने के छह महीने बाद मुमताज की कब्र को शाहजहां पैदल मार्ग से आगरा ले गए थे। फिलहाल इसे लेकर दो मत कि मुमताज की कब्र कौनसी है। जैनाबाद के आहूखाना और पाइनबाग दो एेसी जगह है जहां कब्र होने का दावा किया जाता है।

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ताप्ती किनारे जैनाबाद में आहूखाना

मडपैक थैरेपी से सुरक्षित रखा था शव
मडपैक थैरेपी अर्थात मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाकर मुमताज के शव को छह महीने 9 दिन तक बुरहानपुर में रखा था। ताजमहल के निर्माण में प्रेरणा रही मुमताज की दो-दो अस्थायी कब्र होने को लेकर भी बुरहानपुर सुर्खियों में रहा है। राज्य पुरातत्व का कहना है कि ताप्ती किनारे जैनाबाद में आहूखाने के पास शव रखा तो उधर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग  (एएसआई) एक जगह दफनाना और दूसरी जगह कफन पहनाना बता रहा है।

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बुरहानपुर के शाही किले की छत पर आज भी बना हुआ है ताजमहल का डिजाइन।
यह बताता है कि शाहजहां के दिमाग में इसका मॉडल पहले से था। 
बेजोड़ आर्किटेक्ट, भूकंपरोधी नींव
  ताजमहल के बेस के लिए जमीन में 50 फीट तक खुदाई कराई गई।
  खुदाई के बाद शीशम और सागौन की लकडि़यों के पिलर तैयार किए गए।
  ये बुरहानपुर में संभव नहीं था, क्योंकि यहां दीमक लकड़ी को चट कर जाती हंै।
  आगरा में इसी तरह 110 पिलरों पर ताजमहल की आधारशिला रखी है।
 शीशम-सागौन के बेस पर 450 साल से ताजमहल आज भी खड़ा है।
ये भूकंपरोधी नींव है, क्योंकि लचीले होने के कारण भूकंप का असर नहीं होता है।
  
दीमक से बेस को खतरा था
ताप्ती किनारे बेस बनाने में लकडि़यों का इस्तेमाल हुआ था। दीमक से बेस को खतरा था। इस कारण आगरा में यमुना तट को ताजमहल के लिए चुना गया।
- राकेश शेंडे, वरिष्ठ संरक्षक अभियंता, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, भोपाल 
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संजय दुबे
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