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संसद में दहेज प्रथा के खिलाफ पहली आवाज बनी बंगाल की सांसद रेणु चक्रवर्ती

वामपंथी विचारों की धनी रेणु चक्रवर्ती देश की प्रमुख प्रखर महिला नेताओं के रूप में जानी जाती हैं। उच्च शिक्षा पाने वाली रेणु लोकसभा में 15 साल तक भारतीय नारी की आवाज बन कर रहीं।
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कोलकाता

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Prabhat Kumar Gupta

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Updated: 6 Apr 2019, 10:07 PM IST

kolkata west bengal

संसद में दहेज प्रथा के खिलाफ पहली आवाज बनी बंगाल की सांसद रेणु चक्रवर्ती

- 1952 में बसीरहाट संसदीय क्षेत्र से जीत कर पहुंची थी लोकसभा

प्रभात गुप्ता.

कोलकाता.

वामपंथी विचारों की धनी रेणु चक्रवर्ती देश की प्रमुख प्रखर महिला नेताओं के रूप में जानी जाती हैं। उच्च शिक्षा पाने वाली रेणु लोकसभा में 15 साल तक भारतीय नारी की आवाज बन कर रहीं। देश आजाद होने के उपरांत 1952 में पहली बार हुए लोकसभा चुनाव में रेणु पश्चिम बंगाल के बसीरहाट संसदीय क्षेत्र से भारतीय कम्युिनस्ट पार्टी की सांसद निर्वाचित होकर दिल्ली पहुंची। भाकपा के टिकट पर लगातार तीसरी बार उन्होंने लोकसभा में महिलाओं की प्रखर वक्ता बनी रहीं। 1952 और 1957 में रेणु बसीरहाट से चुनाव जीता था। 1962 में उन्होंने बैरकपुर संसदीय क्षेत्र से भाकपा के टिकट पर जीती। उन दिनों में लोकसभा के पंद्रह श्रेष्ठ वक्ताओं में रेणु का नाम आता था।

महिला अधिकारों की आवाज बनीं-

महिलाओं की आवाज की प्रतीक रहीं रेणु महिलाओं के दामपत्य अधिकारों के लिए उन्होंने संसद के भीतर और बाहर मुखर होकर आवाज बुलंद की। दहेज प्रथा के खिलाफ उन्होंने लोकसभा में जोरदार भाषण भी दिया। 1964 में कम्युनिस्ट पार्टी के विभाजन के बावजूद रेणु अपनी पहचान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सांसद के रूप में ही कायम रखा। 1967 और 1971 के लोकसभा चुनाव में वह माकपा उम्मीदवार से हार गईं। विदेश में छात्र आंदोलन की प्रतीक बनीं रेणु-

कोलकाता में साधन चंद्र ब्रह्म कुमारी राय के परिवार में 21 अक्टूबर 1917 में जन्मी रेणु की प्रारम्भिक शिक्षा सियालदह के निकट लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल में हुई। उच्च शिक्षा के लिए उन्हें कैम्ब्रिज के न्यूनहेम कॉलेज में दाखिला होना पड़ा था। रेणु 1938 में वामपंथी लेखक रजनी पामदत्त के सम्पर्क में आई। छात्र जीवन में वे ब्रिटेन में भारतीय छात्रों के बनाए गए कम्युनिस्ट समूह में सक्रिय भूमिका निभाई थी। बाद में वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्य बनी। 1942 में दामपत्य सूत्र में बंधी-भारतीय संसदीय राजनीति में अपनी अहम छाप छोडऩे वाली बैरकपुर की भाकपा सांसद रेणु 1942 में पत्रकार निखिल चक्रवर्ती के साथ दामपत्य सूत्र में बंध गई। इसके बाद से उनकी राजनीतिक सक्रियता बढ़ती गई। विदेशों से उच्च शिक्षा पाने के बाद भारत लौटी रेणु कलकत्ता विश्वविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य की शिक्षा देने लगी। विश्वविद्यालय में अध्यापन के दौरान उन्होंने महिला आत्मरक्षा समिति का गठन किया।

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