script अब विदेशी भी कथक को समझने लगे हैं : पं. गंगानी | Now even foreigners have started understanding Kathak: Pandit Gangani | Patrika News

अब विदेशी भी कथक को समझने लगे हैं : पं. गंगानी

locationकोलकाताPublished: Dec 28, 2023 06:05:54 pm

पत्रिका से विशेष बातचीत के दौरान कथक नृत्य शैली में रंगाीला शंभू की प्रस्तुति के पीछे की कहानी बताई

अब विदेशी भी कथक को समझने लगे हैं : पं. गंगानी
कोलकाता . पं. राजेन्द्र गंगानी कथक नृत्य की दुनिया के बड़े हस्ताक्षरों में शुमार हैं। वे कोलकाता दौरे पर आए हुए थे। जयपुर में रहने वाले गंगानी ने पत्रिका से विशेष बातचीत के दौरान कथक नृत्य शैली में रंगाीला शंभू की प्रस्तुति के पीछे की कहानी बताई। उन्होंने कथक के मूल स्वरूप से बिना छेड़छाड़ किए नई शैली तैयार करने का स्वागत किया। उन्होंने विदेशों में कथक नृत्य के लोकप्रिय होने के लिए मीडिया को श्रेय देने के साथ ही अन्य विषयों पर बातचीत की। प्रस्तुत है प्रमुख अंश-
प्रश्न- कथक नृत्य शैली में रंगीला शंभू प्रस्तुति के पीछे की कहानी क्या है?
जवाब - आमतौर पर लोग भगवान शिव को उनके रूद्र रूप के कारण जानते हैं। लेकिन उनके अनेक रूप हैं। वे दान शिरोमणि, दयालु और भोले भी हैं। जयपुर में लोग गीत गाकर भगवान शिव को सपरिवार अपने यहां आमंत्रित करते हैं। रंगीला शंभू में भगवान के इन सभी रूपों को दर्शाया गया है। यह लोगों को खूब भाता है।
प्रश्न - इन दिनों आप कथक नृत्य के प्रति लोगों के रुझान को कैसे देखते हैं?
जवाब - हमेशा से लोग अच्छी कला और उसके प्रदर्शन के प्रेमी रहे हैं। वह चाहे नृत्य हो या गीत-संगीत। अभी भी कथक नृत्य की अच्छी प्रस्तुति को पसंद करते हैं। जब नृत्य के साधक बेहतर तरीके से नृत्य पेश करता है तो लोगों को उसका बेसब्री से इंतजार रहता है। आज भी कोलकाता, राजस्थान, पुणे और लखनऊ सहित देश के अन्य जगहों पर कथक नृत्य के साधक हैं और वे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके कार्यक्रम भी होते हैं।
प्रश्न- भारत की तुलना में विदेशों में कथक कितनी लोकप्रिय है?
जवाब - भारत तो कथक नृत्य का जननी रहा है, लेकिन विदेशों में भी इसके रसिक हैं। भारतीय कलाकारों को कथक नृत्य प्रस्तुत करने के लिए विदेशों में बुलाया जाता है। विदेशों में लोग कथक को समझने लगे हैं। इसका श्रेय मीडिया को जाता है।
प्रश्न- कथक की नई शैली कथक के लिए यह कितना अच्छा है?
जवाब- हम चाहते हैं कि नई पीढ़ी के कलाकार कथक में नए-नए प्रयोग कर नई शैली विकसित करें। लेकिन इसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। अगर इसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ हुई तो कथक और कलाकार दोनों के लिए ठीक नहीं होगा।

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