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कुमार विश्वास की पोस्ट पर आपत्तिजनक कमेंट: ‘मीणा परिवार’ के पैर छूकर ‘ब्राह्मण समाज’ को किया कलंकित

ख्यात कवि कुमार विश्वास के शहीद हेमराम मीणा के माता-पिता के पैर छूने की फोटो पर सोशल मीडिया में बवाल हो गया है।
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कोटा

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Zuber Khan

•

Apr 02, 2019

Offensive comments on Kumar Vishwas

कुमार विश्वास की पोस्ट पर आपत्तिजनक कमेंट: 'मीणा परिवार' के पैर छूकर 'ब्राह्मण समाज' को किया कलंकित

कोटा. राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में कोटा में आयोजित कार्यक्रम में ख्यात कवि कुमार विश्वास के शहीद हेमराम मीणा के माता-पिता के पैर छूने की फोटो पर सोशल मीडिया में बवाल हो गया है। ट्विटर पर पोस्ट की गई उस फोटो पर आपत्तिजनक कमेंट देखकर कुमार विश्वास ने गहरी नाराजगी जताते हुए धार्मिक कट्टरता और जातिवाद पर गहरा कटाक्ष किया है।

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हुआ यूं कि 30 मार्च को कोटा में सामाजिक संगठनों की ओर से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया था, जिसमें कुमार विश्वास ने राष्ट्र एवं देशभक्ति से ओत-प्रोत काव्य पाठ किया। आयोजन में पुलवामा हमले में शहीद सीआरपीएफ के हैडकांस्टेबल हेमराज मीणा के माता-पिता भी शामिल हुए थे। उन्हें देख कुमार विश्वास ने उन्हें मंच पर बुलाया और सम्मान कर उनके पैर छूए। उन क्षणों के फोटो को कुमार ने 31 मार्च को ट्विटर पर पोस्ट किया, लेकिन उनके कट्टर जातिवादी समर्थकों को यह पसंद नहीं आया और उन्होंने पोस्ट पर मैसेज कर आपत्तिजनक कमेंट किए।

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पोस्ट कर जताई नाराजगी
यह देख कुमार ने अपने फेसबुक पेज पर गहरी नाराजगी जताते हुए लिखा है कि अजीब हाल हो गया है हमारे देश का। कोई कुछ सुनने समझने को तैयार नहीं है। पुलवामा के अमर शहीद हेमराज मीणा के पूज्य माता-पिता दो पहले कोटा के मेरे शा में पधारे तो हम सबने उन्हें कृतज्ञ आग्राहपूर्वक मंच पर आमंत्रित किया। उसी क्षण मैंने उन वीर प्रसूता माता और देश पर कुर्बान नर नाहर के पूज्य पिता को बैठकर चरण स्पर्श किया। आज परदेश में मैसेज बॉक्स देखा तो कई जाति -कुल के कुएं में पड़े कूप मंडूक मूर्खों ने मुझे भर भर गालियां देकर कोसा है कि मैंने अपने ब्राह्मण होने को कलंकित किया है मीणा परिवार के सार्वजनिक रूप से पैर छूकर।

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सिरियसली? क्या जहालत यहां तक आ गई है? हर आदमी अपनी निजी तुच्छता और औछेपन को बाहर लाकर जाति-धर्म की ढाल बनाकर, घृणा और विद्वेष फैला रहा है और हम ऐसों के बहाव में बह रहे हैं। हद है भई। तो सुनो हर तरफ के और तरह के जाहिलों, देश-समाज विभाजकों, तुम्हारी धमकियां और सलाह जूते की नोक पर। समझे। मुझे तुमसे न धर्म समझना है न ब्राह्मणत्व की परिभाषा। अपनी जाति धर्म की आत्ममुग्धताएं अपने घर रखो।