कोटा में पांच साल से अटका है वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट

विधायक संदीप शर्मा ने उठाया सवाल : सरकार ने कहा, संवेदकों ने रुचि नहीं दिखाई

Suraksha Rajora

14 Feb 2020, 02:34 PM IST

कोटा . कोटा समेत प्रदेश के किसी भी शहर में अभी तक वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ है। कोटा में भी पांच साल से यह प्रोजेक्ट अटका पड़ा है। कचरे से बिजली बनाने में संवेदकों ने रुचि नहीं दिखाई। विधानसभा में गुरुवार को कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा के सवाल पर सरकार ने जवाब में यह जानकारी दी।


विधायक शर्मा ने प्रश्न पूछा था कि प्रदेश में किन-किन स्थानों पर वेस्ट टू एनर्जी प्लांट कब से कार्य कर रहे हैं, इसकी जानकारी दें। क्या कोटा शहर में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाना प्रस्तावित है? किस योजना में यह प्लांट लगाया जाना है। देरी के क्या कारण हैं? इस पर सरकार ने लिखित जवाब में कहा कि वर्तमान में प्रदेश में किसी भी जिले में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट कार्यरत नहीं है। वेस्ट टू एनर्जी प्लांट के लिए जयपुर तथा जोधपुर में टेण्डर हो गए हैं।

कार्यादेश दिया जा चुका है तथा लीज डीड प्रक्रियाधीन है। कोटा जिले में वेस्ट टू एनर्जी संयंत्र स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2016 से प्रस्तावित है। वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की स्थापना के लिए पहली बार टेण्?डर 21 अप्रेल 2016 को किए गए थे, जिसमें फ र्म को कचरे की मात्रा में संदेह होने के कारण अनुबंध नहीं हो सका। द्वितीय बार निविदा 27 जुलाई 2017 को जारी की गई, जिसमें कोई भी फ र्म सक्षम नहीं पाई गई।

तीसरी बार निविदा 15 नवम्बर 2017 को की गई, जिसमें फर्म से नेगोशिएशन के बाद भी दरें उचित प्रतीत नहीं होने के कारण चौथी बार निविदा 28 नवम्बर 2018 को जारी की गई। इसमें किसी भी संवेदक द्वारा भाग नहीं लिया गया। कोटा शहर में प्रतिदिन लगभग औसतन 350 टन कचरा उठवाया जाता है, जिसे नांता ट्रेंचिंग ग्राउण्ड में खाली करवाया जाता है।


चम्बल नदी को पर्यटन से जोडऩे का प्रयास
पर्यटन राज्य मंत्री गोविन्दसिंह डोटासरा ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार द्वारा चम्बल नदी को पर्यटन से जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है। चम्बल नदी पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चंबल सफ ारी का संचालन किया जा रहा है।


डोटासरा ने प्रश्नकाल में विधायक संदीप शर्मा के मूल प्रश्न के जवाब में बताया कि कोटा संभाग में टूरिज्म सर्किट के विकास की कोई योजना वर्तमान में विचाराधीन नहीं है। विभाग की ओर से प्रदेश में विभिन्न मेले, त्योहारों का आयोजन किया जाता है, जिनमें हाड़ौती क्षेत्र के लोक कलाकारों द्वारा भी अपनी कला का प्रदर्शन किया जाता है।

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