Naresh Goyal की बढ़ सकती है मुश्किलें, Jet लाॅयल्टी प्रोग्राम पर ED कर सकता है पूछताछ

  • नरेश गोयल से पूछताछ कर सकता है ED
  • 650 करोड़ रुपये के टैक्स चोरी पर भी होगी जांच।
  • मंगलवार को 41 फीसदी लुढ़के थे Jet Airways के शेयर्स।

By: Ashutosh Verma

Updated: 19 Jun 2019, 12:36 PM IST

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय ( enforcement directorate ) बहुत जल्द जेट एयरवेज ( Jet Airways ) के संस्थापक और लंबे समय तक चेयरमैन रहे नरेश गोयल ( naresh goyal ) से एयरलाइन के लाॅयल्टी प्रोग्राम को लेकर पूछताछ कर सकता है। प्रवर्तन निदेशालय को संदेह है कि रॉयल्टी प्रोग्राम के तहत स्टेक की बिक्री हुई है। बिजनेस अखबार इकोनॉमिक टाइम्स ने इसका जिक्र किया है। साथ ही ईडी जेट एयरवेज और उसकी यूनिट्स पर कथित तौर पर 650 करोड़ रुपए के टैक्स चोरी की भी जांच करेगा। ईडी यह पता लगाना चाहता है कि इसके लिए कहीं फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट ( FEMA ) के नियमों का उल्लंघन किया गया है या नहीं।

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मई में ED ने जेट के सीनियर अधिकारियों से की थी पूछताछ

साल 2012 तक जेट एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड ( JPPL ) का मालिकाना हक पूरी तरह से जेट एयरवेज के पास था। इसके बाद एतिहाद एयरवेज ( Etihad Airways ) एयरवेज ने इसमें 50.1 फीसदी हिस्सेदारी खरीदा था। बाकी का 49.9 फीसदी हिस्सेदारी जेट एयरवेज के पास है। साल 2013 में एतिहाद एयरवेज ने जेट एयरवेज में 24 फीसदी की हिस्सेदारी खरीदा था। पहले भी प्रवर्तन निदेशालय JPPL में 15 करोड़ डॉलर के इस स्टेक बेचे जाने पर जांच कर चुका है। गत मई माह में भी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

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जेट के शेयरों में भारी गिरावट

गत मंगलवार को जेट एयरवेज शेयर्स ( Jet Airways Shares ) सबसे निचले स्तर पर फिसल चुका था। जेट के शेयरों में यह भारी गिरावट ठीक एक दिन बाद हुआ जब लेंडर्स ने कंपनी को दिवालिया कानून के तहत एनसीएलटी का फैसला लिया। बीते दिन यानी मंगलवा को जेट एयरवेज के शेयरों में करीब 40.78 फीसदी गिरावट दर्ज किया गया। इसके बाद कंपनी के शयर 40.45 रुपए प्रति शेयर की दर पर बंद हुए।

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FIPB नियमों के उल्लंघन के बारे में भी हो सकती है पूछताछ

अपनी जांच में ED इस बारे में भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या एतिहाद को जेट एयरवेज में निवेश करने के लिए फाॅरेन इन्वेस्टमेंट एंड प्लानिंग बोर्ड ( FIPB ) से मंजूरी मिली थी। बता दें कि FIPB को मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ही बंद कर दिया था। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, शुरुआती जांच से यह संकेत मिला है कि इस डील में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ( FDI ) के नियमों को भी उल्लंघन किया गया है।

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