
69000 शिक्षक भर्ती में इनके लिए सरकारी नौकरी पाना नहीं होगा इतना आसान, शिक्षामित्र और दूसरे अभ्यर्थियों ने बढ़ाई टेंशन
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए सभी अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन लेने शुरू हो गए हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार इस कोशिश में है कि शिक्षक भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नियुक्ति देने का काम शुरू किया जा सके। जिससे यह प्रक्रिया जल्द पूरी हो और अभ्यर्थियों को सरकारकी नौकरी मिले। यही वजह है कि शिक्षक भर्ती परिणाम जारी होने के एक हफ्ते के अंदर ही अभ्यर्थियों से आवेदन भी लेने शुरू हो गए हैं। हालांकि इस 69000 शिक्षक भर्ती में अभ्यर्थियों की राह में कई रोड़े भी हैं। क्योंकि 69000 शिक्षक भर्ती रिजल्ट से शिक्षामित्रों समेत कई अभ्यर्थी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए हैं और याचिका दायर के अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं।
सामान्य वर्ग ने की ये मांग
69000 शिक्षक भर्ती परिणाम को लेकर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की मांग है कि वे लोग जिन भी लोगों ने भर्ती प्रक्रिया की किसी भी स्टेज पर आरक्षण का फायदा लिया हो उनको उसी आरक्षित वर्ग में सीट दी जाए। हालांकि हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ से कटऑफ मामले में आये आदेश में साफ लिखा है कि लिखित परीक्षा सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया के लिए केवल एक योग्यता परीक्षा है। इसलिए फिलहाल सामान्य अभ्यर्थियों को ओवरलैपिंग के विरोध के मामले में कोई खास राहत मिलने वाली नहीं है। हालांकि इससे बाकी अभ्यर्थियों की टेंशन जरूर बढ़ी हुई है।
शिक्षामित्र पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कटऑफ मुद्दे का निस्तारण करते हुए 6 मई को 60/65 प्रतिशत (सामान्य के लिए 97 और ओबीसी, एससी, एसटी और अन्य आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 90 अंक) पर रिजल्ट जारी करने का आदेश दिया था। हालांकि इस आदेश से बड़ी संख्या में शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी संतुष्ट नहीं है। इन असंतुष्ट अभ्यर्थियों में मुख्य रूप से शिक्षामित्र हैं। शिक्षामित्रों का कहना है कि 1 दिसंबर 2018 को जारी शासनादेश में कटऑफ का जिक्र नहीं था। सरकार ने नियम के खिलाफ जाकर 6 जनवरी 2019 को आयोजित परीक्षा के एक दिन बाद कटऑफ लागू किया। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ शिक्षामित्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर कर दी है। दरअशल कटऑफ लागू होने से बड़ी संख्या में शिक्षामित्र शिक्षक भर्ती चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं और इसीलिये उन्होंने इसके विरोध में अपनी याचिका दाखिल की है।
कई अभ्यर्थी संशोधित उत्तरमाला से असंतुष्ट
बीती 9 मई, 2019 को जारी शिक्षक भर्ती परीक्षा की संशोधित उत्तरमाला को लेकर भी नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने कहा है कि विशेषज्ञ समिति का गठन करके सभी आपत्तियों का निस्तारण किया गया है। पाठ्यक्रम के बाहर से पूछे गए हिन्दी के तीन प्रश्नों पर सभी अभ्यर्थियों को समान एक-एक नंबर (कुल तीन-तीन नंबर) दे दिए गये हैं। लेकिन एक-दो नंबर से असफल अभ्यर्थी इस संशोधित उत्तरमाला से संतुष्ट नहीं हैं। सबसे अधिक विवाद नाथ सम्प्रदाय के प्रवर्तक को लेकर है। विषय विशेषज्ञों ने मस्त्येन्द्रनाथ को सही माना है जबकि छात्र तथ्यों के साथ गोरखनाथ को सही बता रहे हैं। कुछ अन्य प्रश्नों पर भी विवाद है जिसे लेकर असफल अभ्यर्थी हाईकोर्ट का रुख कर रहे हैं और इस शिक्षक भर्ती में बाकी अभ्यर्थियों के आगे मुसीबत खड़ी कर सकते हैं।
Updated on:
19 May 2020 02:19 pm
Published on:
19 May 2020 02:15 pm
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