कारण सरकारी मशीनरी की सुस्त चाल हो या निर्णय लागू करने वालों की उपेक्षापूर्णनीति, प्रदेश में सहकारी समितियों से लेकर कर्इ निगमों के एक्कीस हजार से ज्यादा कर्मचारी 1986 में आए चौथे वेतन आयोग की सिफारिशों की सैलरी पर ही काम कर रहे हैं। समितियों में ताे कर्इ जगह ठीक से चौथे वेतन आयोग की अनुसार भी सैलरी नहीं मिल रही है। अब जब सातवों वेतन आयोग आ गया है, तो राज्य कर्मचारियों अौर निगमों तथा इन समितियों में काम करने वाले कर्मचािरयों के वेतन का अंतर काफी बढ़ जाएगा।