Ground Report : राम की नगरी में मुद्दा बन गए कांशीराम

 Ground Report : राम की नगरी में मुद्दा बन गए कांशीराम
ayodhya kanshiram

न्यूनतम विकास की बाट जोह रही उपेक्षा का दर्द सहेजे अयोघ्या

डॉ.संजीव

राम की पैड़ी (अयोध्या).
भइया संभाल के बैक करो... दिखाई नहीं देता गड्ढा है। ...अरे यहां क्या देख रहे हो, पूरी अयोध्याजी में गड्ढे ही गड्ढे हैं। बुजुर्ग रामसेवक के मुंह से यह सुनना अयोध्या के लिए नया नहीं है। वे कहते हैं कि राम की पै़ड़ी बनी थी तो कहा गया था कि हरिद्वार की हर की पैड़ी की तरह सुंदर होगी, किन्तु आज यहां कीचड़ और नालानुमा दृश्य ही दिखता है। यही हाल पूरे अयोध्या का है। लोग निराश हैं, किन्तु उम्मीद लगाए हैं। चुनाव का दौर है, देश दुनिया का मीडिया एक बार फिर वहां पहुंचा है, किन्तु इस बार अयोध्या कुछ अलग तरह से सोच रही है। राम की नगरी में कांशीराम मुद्दा बन गए हैं। लड़ाई में शामिल तीनों राजनीतिक दलों के लोग ध्रुवीकरण के समीकरणों से जूझ रहे हैं और इसके लिए कांशीराम का नाम खूब लिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अयोध्या चाहे-अनचाहे मुद्दा बन ही जाता है। अयोध्या वालों को भी पता है कि वे मुद्दा हैं। अयोध्या सीमा पर चाय बेच रहे राजेश यादव का यह दर्द उभर ही आता है। वे कहते हैं कि हमें बस मुद्दा बनाकर रख दिया गया है। याद करने लगते हैं किस तरह तीर्थयात्रियों से भरी अयोध्या कभी सिर्फ अयोध्या नहीं होती थी, अयोध्याजी होती थी। अचानक उनके मुंह से निकलता है, इन नेताओं ने हमें कहीं का नहीं छोड़ा। 

वहीं मिले लालबाग निवासी मो.फैय्याज। वे कहते हैं कि हम शांति से रहते थे, अब भरोसा टूट सा गया है। राजेश तपाक से बोले, चचा सब मौके की ताक में रहते हैं। देखो बसपा ने इसी लिए बज्मी को उम्मीदवार बना दिया। 


दरअसल बज्मी सिद्दीकी को बहुजन समाज पार्टी का टिकट मिला है और यह पहली दफा हुआ है, जब अयोध्या विधानसभा सीट से किसी राजनीतिक दल ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारा है। दरअसल, अब अयोध्या में बड़ा मुद्दा भी बज्मी ही हैं। बज्मी के सहारे लोगों को कांशीराम याद आ रहे हैं। दो दिन पहले आजम खां वहां गए और मुसलमानों से यहां तक कह दिया कि भाजपा को वोट दे देना, पर बसपा को मत देना। इसके बाद से मुसलमानों के बीच सपाई तर्क दे रहे हैं कि बसपा वही पार्टी है, जिसके संस्थापक कांशीराम ने अयोध्या मसले के समाधान के लिए बाबरी मस्जिद की जगह शौचालय बनाने का प्रस्ताव किया था। सपा मुसलमानों को इस मसले पर अपने साथ जोड़ना चाहती है, तो भाजपाई कांशीराम का नाम लेकर हिन्दुओं को एकजुट करने की कोशिश में लगे हैं। उनका कहना है कि पहली दफा मुसलमान को टिकट देकर बसपा ने जो कार्ड खेला है, उसका जवाब देना होगा। यही नहीं ये लोग भी कांशीराम का बयान याद दिलाकर रामलला के मंदिर की जगह शौचालय बनाने को बसपा की इच्छा करार दे रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी वेद प्रकाश गुप्ता कहते हैं कि राम की नगरी में रामलला के जन्मस्थल पर शौचालय बनाने की इच्छा रखने वालों को जनता करारा जवाब देगी। अयोध्या हिन्दू समाज की आस्था का केंद्रबिंदु है और आस्था से खिलवा़ड़ बर्दाश्त नहीं होगा। 


बसपा प्रत्याशी बज्मी सिद्दीकी कहते हैं कि विरोधी जबरन यह मुद्दा उठा रहे हैं। अब न कांशीराम हैं न यह मुद्दा है। मुसलमान समझदार हैं और सिर्फ मुसलमान ही नहीं, अयोध्या के सभी लोग बसपा के साथ जुड़ रहे हैं। वैसे इस मसले पर संतों में भी गुस्सा है। हनुमान गढ़ी के महंत संजय दास कहते हैं कि रामलला के जन्म स्थल पर शौचालय जैसे बयान अब दोबारा याद तक नहीं दिलाए जाने चाहिए। जो लोग ऐसा कर रहे हैं, उन्हें जनता कभी क्षमा नहीं करेगी।





...पर रामलला तो कोई न आया

अयोध्या के हर कदम पर अपने रामलला से जुड़ाव दिखता है। आज भी रामलला के दर्शन के लिए कतारें लगती हैं। वहीं मिले हेमंत मिश्र इस बात से दुखी थे, कि बात-बात में रामलला की बातें करने वाले एक भी नेता ने रामलला आना जरूरी नहीं समझा। जनता यह सब भी देख रही है। शिक्षक उमाशंकर शुक्ला के मुंह से निकला, अरे किसी को रामलला या राम की अयोध्या की परवाह नहीं है। वहीं मौजूद दूसरे शिक्षक देव चंद्र यादव भी चुप नही रह सके। कहा, सबको देख लिया... सब एक जैसे निकले। राजेंद्र कुमार को तो मानो क्रोध आ गया और बोले, श्राप लगेगा नेताओं को। चर्चा बढ़ी तो कहा, राम के बिना अयोध्या की कल्पना नहीं हो सकती। ऐसे में वही जीतेगा जो श्रीराम जैसी अयोध्या की परिकल्पना करे और फिर जीतने के बाद उसे साकार करके दिखाए। फिर आवाज आई, हमें अपने राम पर भरोसा है... यह सब ज्यादा दिन नहीं चलेगा, सब ठीक हो जाएगा।


...तो अब हम मुसलमान हो गए

आप अयोध्या गए हैं तो रामलला की खड़ाऊं खरीद कर लाना न भूलिएगा... वही खड़ाऊं, जिसे लेकर भरत ने राज किया था। पर यहां आपको बता दूं कि वह खड़ाऊं किसी रफीक या जावेद ने बनाई होगी। जी हां, मां सीता के गले में पड़ी माला हो या राम के पांव की खड़ाऊं, उनका निर्माण अयोध्या के मुसलमान ही करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में हुए आपसी वैमनस्य से वे आहत हैं। पैंसठ साल के अब्दुल हफीज रीढ़गंज में रहते हैं। उनसे बात करने पर यह दर्द साफ दिखाई देता है। वे कहते हैं कि पहले हम सब सिर्फ राम की प्रजा थे, अब वे हिन्दू और हम मुसलमान हो गए हैं। मो.अय्यूब युवा हैं। वे कहते हैं कि स्थानीय हिन्दू-मुस्लिम आज भी एक होकर रहना चाहते हैं पर नेता नाश किये हैं। फिर सवाल उठाते हैं... आप ही बताइये कभी आपने सुना है कि अयोध्या के हिन्दू मुसलमान आपस में लड़े। नहीं ना... तो हम कभी नहीं लड़ेंगे, हमें बस राम की सेना बने रहने दीजिए।

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