बसपा में बगावत : राज्यसभा प्रत्याशी के 5 प्रस्तावकों ने नाम वापस लिया

- बसपा प्रत्याशी रामजी गौतम का नामांकन हो सकता है नामांकन रद्द
- सतीश मिश्रा बोले- नियमों में नाम वापस लेने का प्रावधान नहीं

By: Hariom Dwivedi

Published: 28 Oct 2020, 04:28 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में बुधवार को एक नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम में बसपा के पांच विधायकों ने अपनी पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी रामजी गौतम के नामांकन प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए अपना नाम वापस लेने का अनुरोध किया है। कहा कि अब मैं प्रस्तावक नहीं हूं। यहां से निकलने के बाद सभी विधायक सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मिलने पार्टी कार्यालय पहुंचे और बहुजन समाज पार्टी छोड़ने के संकेत दिये। बागी विधायकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रस्तावक के तौर पर उनके फर्जी दस्तखत जमा किए गए हैं। पार्टी के उम्मीदवार रामजी गौतम के नामांकन के समय उनमें से कोई मौजूद नहीं था। बसपा विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा ने कहा कि सभी विधायक नामांकन के समय स्वयं मौजूद थे। उनको नाम वापसी का हक नहीं है। इस सम्बंध में साक्ष्य उपलब्ध करा दिए हैं। इस बीच बसपा की ओर से पार्टी का पक्ष प्रस्तुत करने महासचिव सतीश मिश्रा भी विधानसभा पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसी प्रस्तावक को अपना नाम वापस लेने का प्रावधान नियमों में नहीं है। ऐसा होता है तो कोई चुनाव संपन्न नहीं हो सकता।

श्रावस्ती के भिनगा से बसपा विधायक असलम राईनी ने कहा कि उनके साथ धोखा हुआ है। कहा कि चार विधायकों ने लिखकर दिया है कि राम जी गौतम के प्रस्तावक के रूप में उन लोगों ने दस्तखत नहीं किया। उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाए गए हैं।

विधायक राईनी के बेटे व प्रतिनिधि आतिफ असलम ने कहा कि कूटरचित हस्ताक्षर के लिए वह विधिक कार्रवाई करेंगे। फर्जी हस्ताक्षर की शिकायत करने वाले विधायकों में मुज्तबा सिद्दीकी, हाकिम लाल बिंद व असलम चौधरी हैं। इतना ही नहीं राईनी ने बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा पर देख लेने व जान से मरवाने की धमकी देने का आरोप भी लगाया है।

राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी के प्रस्तावक के रूप में 10 विधायकों का होना जरूरी होता है लेकिन, अब बसपा के पांच विधायकों ने अपना प्रस्ताव वापस ले लिया है। ऐसे में अब स्क्रूटनी के दौरान बसपा प्रत्याशी का नामांकन रद्द होना तय माना जा रहा है। ऐसे में अगर बसपा प्रत्याशी का नामांकन रद्द होता है तो सपा समर्थित प्रकाश बजाज की राह थोड़ी आसान हो सकती है। उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। अगर बसपा प्रत्याशी का नामांकन रद्द हुआ तो मैदान में कुल 10 प्रत्याशी ही बचेंगे। भाजपा की ओर से आठ, समाजवादी पार्टी और एक निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में है। नौ नवंबर को राज्यसभा की 10 सीटों के लिए मतदान होगा। इसी दिन चुनाव परिणाम आएगा।

बसपा के 7 विधायक बागी
बहुजन समाज पार्टी के विधायक असलम चौधरी, असलम राईनी, मुज्तबा सिद्दीकी, हाकिम लाल बिंद, हरगोविंद भार्गव ने अपना प्रस्ताव वापस लिया है। इनके अलावा आजमगढ़ की सगड़ी से बसपा विधायक वंदना सिंह और जौनपुर के मुंगरा बादशाहपुर की विधायक सुषमा पटेल ने बगावत की राह पकड़ ली है। लेकिन, विधायक वंदना सिंह के जेठ टीपू सिंह ने कहा, उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है।

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राज्यसभा का चुनावी गणित?
उत्तर प्रदेश विधानसभा में अभी 395 (कुल सदस्य संख्या-403) विधायक हैं जबकि 8 सीटें खाली हैं। इनमें से 392 वोट ही पड़ेंगे, क्योंकि जेल में बंद विधायक मुख्तार अंसारी, तंजीन फातिमा और विजय मिश्र वोट नहीं डाल सकेंगे। ऐसे में एक कैंडिडेट को जिताने के लिए 36 वोटों की जरूरत पड़ेगी। आठ कैंडिडेट को जिताने के बाद भी बीजेपी के पास अपना दल (09) और सपा-बसपा के बागी विधायकों को मिलाकर कम से कम 25 वोट अतिरिक्त बचते हैं। एक कैंडिडेट को जिताने के बाद सपा के पास 12 वोट बचेंगे। इसके अलावा अलावा बसपा के पास 18, कांग्रेस के पास 07 और ओम प्रकाश राजभर की पार्टी के चार विधायक हैं, जबकि 4 निर्दलीय और एक निषाद पार्टी से विधायक है।

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सपा में सबका स्वागत : एमएलसी उदयवीर
समाजवादी पार्टी के एमएलसी उदयवीर सिंह ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने निर्दलीय प्रत्याशी प्रकाश बजाज का समर्थन किया है। अगर दूसरी पार्टी के विधायक भी सपोर्ट करने चाह रहे हैं तो उनका स्वागत है। कुल 6 विधायकों ने सपा अध्यक्ष से मुलाकात की है। बसपा विधायकों के भविष्य पर पूछे गए सवाल पर उदयवीर बोले कि विधायकों की मर्जी पर है कि वह किस पार्टी में जाने का निर्णय लेंगे। समाजवादी पार्टी में हर किसी का स्वागत है।

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