अनोखी पहल: टीचर्स डे पर नहीं लिया गिफ्ट, बच्चों को दिया ये टास्क

अनोखी पहल: टीचर्स डे पर नहीं लिया गिफ्ट, बच्चों को दिया ये टास्क

Prashant Srivastava | Publish: Sep, 05 2018 08:25:41 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

राजधानी स्थित सेंट फ्रांसिस स्कूल की टीचर कैरोलाईन बौरजेस ने शिक्षक दिवस पर अनोखी पहल करते हुए स्कूल में गिफ्ट देेने की परंपरा को बदलने की कोशिश की है।

लखनऊ. शिक्षक दिवस पर अपनी टीचर के लिए स्टूडेंट्स अक्सर गिफ्ट ले जाते हैं। राजधानी स्थित सेंट फ्रांसिस स्कूल की टीचर कैरोलाईन बौरजेस ने अनोखी पहल करते हुए स्कूल में इस परंपरा को बदलने की कोशिश की है। उन्होंने स्टूडेंट्स से अपील की है कि मुझे गिफ्ट्स या कार्ड देने से अच्छा है कि आप मुझे किसी कागज पर मेरे बारे में अपनी भावनाएं लिखकर दें। वो कागज और उस पर लिखी भावनाएं मेरे लिए कार्ड्स से कीमती होंगी। वहीं गिफ्ट्स और कार्ड्स पर पैसे खर्च करने के बजाय किसी गरीब या जरूरतमंद को एक वक्त का खाना खिलाएं, वो बेहतर होगा। ऐसा करते हुए अपनी फोटो खींचकर मुझे फेसबुक पर टैग करें। ये मेरे लिए किसी गिफ्ट से कम नहीं होगा। सिर्फ एक दिन ही नहीं बल्कि मदद के इस गुण को अपनी आदत में शुमार करें।

इस इनीशिएटिव के बारे में बात करते हुए कैरोलाईन ने बताया कि सातवीं क्लास के सैफ ने स्ट्रीट डॉग्स को खाना खिलाया, वहीं आदित्य गोयल ने गरीबों को खाना खिलाया और तस्वीरें भी भेजीं। इसके अलावा कक्षा आठ के श्रेष्ठ ने डॉग को रेस्क्यू किया। इसी तरह तमाम स्टूडेंट्स ने अच्छा काम करके टीचर को अपनी सेल्फी भेजी। कैरोलाइन के मुताबिक, सिर्फ एग्जाम में अच्छे नंबर पाने के लिए या नौकरी के लिए स्टूडेंट्स को तैयार करना ही टीचर का मकसद नहीं है। टीचर वो है, जो उन्हें जिंदगी के अच्छे सबक सिखाए। ट्रेनर और टीचर में शायद यह जमीनी फर्क होता है। सेंट फ्रांसिस कॉलेज की टीचर कैरोलिन की यही सोच इस बार स्टूडेंट्स को कुछ अच्छा सीखने और करने के लिए प्रेरित करेगी। वह कहती हैं कि आज के दौर में टेक्नोलॉजी के पिंजरे में कैद बच्चों तक संवेदनाएं और भावनाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। इसका नतीजा यह है कि बच्चे दूसरों की मदद जैसे बुनियादी इंसानी गुणों से महरूम होते जा रहे हैं।

इससे पहले भी किए हैं कई अनोखे इनीशिएटिव

इस शिक्षक ने इससे पहले भी कई बार ऐसे अनोखे इनीशिएटिव किए हैं। इनमें वॉटर बाउल सेल्फी काफी चर्चा में था। दरअसल इसमें बच्चे पशु-पक्षियों की भूख-प्यास मिटाने के लिए घर के आसपास बाउल रखते हैं, जहां वे अपनी प्यास बुझा सकें। कॉन्टेस्ट में बच्चे बाउल वाली सेल्फी क्लिक कर कोलाज बनाने के बाद स्कूल में सबमिट करना था। इन सभी में से हर क्साल से तीन बच्चों को सम्मानित किया गया।

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