यूपी में जन स्वास्थ्य को लेकर अस्थाई नहीं स्थाई व्यवस्था बने : सिद्धार्थ नाथ

• देश में पहली बार जन स्वास्थ्य के दक्षता संवर्धन पर हुई कार्यशाला

• चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने की अध्यक्षता

• जॉन हापकिंस, बीएमजीएफ व एसआईएचएफडब्ल्यू के सहयोग से हुई कार्यशाला

By: Neeraj Patel

Published: 26 Jul 2019, 08:56 PM IST

लखनऊ. चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने शुक्रवार को सिस्टम स्ट्रेंथन पर ज़ोर दिया। उन्होने कहा कि हम अभी भी 40-50 वर्ष पुरानी व्यवस्था पर काम कर रहे हैं। हमारे पास योग्य डॉक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मियों की बड़ी संख्या है। लेकिन उनमें से कई लोगों से प्रशासनिक आदि कार्य कराया जा रहा है। हमें अस्थाई नहीं बल्कि स्थायी व्यवस्था बनानी है। सिद्धार्थ नाथ जॉन हापकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और द बिल गेट्स एंड मिलिंडा फ़ाउंडेशन के सहयोग से एक होटल में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग को जॉन हापकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ सहयोग दे रहा है। इसके सहयोग से यूपी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान स्वास्थ्यकर्मियों को जन स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए सक्षम बना सकेगा। मंत्री ने कोर कांपेटेंसीज फॉर पब्लिक हेल्थ प्रोफेसनल्स इन उत्तर प्रदेश विषय पर देश की पहली कार्यशाला करवाने के लिए द बिल गेट्स एंड मिलिंडा फ़ाउंडेशन (बीएमजीएफ) को धन्यवाद दिया।

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घर-घर स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने में आ रहीं कई चुनौतियां

मंत्री ने कहा कि प्रदेश में घर-घर स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने में कई चुनौतियां आ रही हैं। वहीं कुछ जिलों में शुरू हो चुकी टेलीमेडिसिन, टेलीरेडिओलॉजी जैसे सेवा से मरीजों को काफी राहत मिल रही है। उन्होने कहा कि मैं आप सभी से अपेक्षा करूंगा कि प्रदेश की जरूरत के हिसाब से जन स्वास्थ्य के खास क्षेत्रों में प्रशिक्षण का आंकलन करें। जन स्वास्थ्य प्रोफेसनल्स की शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए जो आवश्यकता होगी। उसकी पूरी सहायता की जाएगी।

जॉन हापकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोजेक्ट प्रिन्सिपल इंवेस्टिगेटर प्रोफसर डॉक्टर डेविड पीटर्स ने कार्यशाला का उद्देश्य बताया। उन्होने बताया कि किसी भी प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में यदि समय के साथ परिवर्तन नहीं किया गया तो अच्छी से भी अच्छी योजना दम तोड़ देती है। कहीं की भी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए मानव संसाधन रीढ़ की हड्डी की तरह है। इस संसाधन के लिए प्रशिक्षण अतिआवश्यक है।

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ये लोग रहे मौजूद

कार्यशाला के दौरान जॉन हापकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफसर डॉक्टर सारा, डॉक्टर साइरस इंजीनियर और डॉक्टर ब्राइन व्हल ने पब्लिक हेल्थ की हकीकत और भविष्य की आवश्यकताओं पर प्रस्तुतीकरण किया। स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड फेमिली वेलफेयर (एसआईएचएफडब्ल्यू) की निदेशक डॉक्टर पूजा पांडे ने उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की संक्षित जानकारी देते हुये कार्यशाला की शुरुआत की। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक पंकज कुमार, सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण वी हेकालीझिमोमी, निदेशक (प्रशासन), राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अपर मिशन निदेशक श्रुति के साथ यूपीटीएसयू और जॉन हापकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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