एथलीट मनीषा ने बताया कि, 12 साल पहले टीवी पर लड़कियों को खेल में पदक जीतते हुए देखा था। उस दिन से एथलीट बनने का सपना आंखों तैरने लगा। प्रशिक्षण की सुविधा नहीं थी बीहड़ में दौड़ लगाती। चोट लगी पर हिम्मत नहीं हारी। बीहड़ की पगडंडियों पर दौड़ते हुए अच्छा समय निकालने लगी तो स्थानीय, जिला स्तर पर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया।