निजी मेडिकल कालेजों में पीजी कोर्स में नहीं मिलता आरक्षण

सूबे के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण की व्यवस्था है।

By: Rohit Singh

Published: 14 Apr 2017, 04:22 PM IST

लखनऊ। सूबे के निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की पीजी सीटों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार को सफाई देनी पड़ रही है। गुरुवार को मीडिया में खबर आयी कि योगी सरकार ने निजी मेडिकल कालेजों में पीजी में आरक्षण की व्यवस्था ख़त्म कर दी है। इसके बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया के बाद राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट की।

प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यूपी में निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की पीजी सीटों के लिए कभी आरक्षण की व्यवस्था थी ही नहीं और न ही सरकार की ओर से इन कॉलेजों की नीति में कोई बदलाव किया गया है। हालांकि सूबे के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण की व्यवस्था है।

अभी तक यह व्यवस्था
उप्र के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में अनुसूचित वर्ग के स्टूडेंट्स को प्रवेश में 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को 2 प्रतिशत, पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत और दिव्यांग श्रेणी के छात्रों  को 3 प्रतिशत के आरक्षण का लाभ मिलता है। 

देश के अन्य प्रदेशों का हाल
मेडिकल के पीजी कोर्स में देश के किसी अन्य राज्यों में भी सरकारी कालेजों में आरक्षित वर्ग के उम्म्मीदवारों को तय कोटे के हिसाब से दाखिला मिलता है। लेकिन पीजी कोर्स में निजी क्षेत्र के मेडिकल कालेजों में आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। 

यूं फैली अफरातफरी
प्रदेश के मेडिकल कालेजों में पीजी के दाखिले में आरक्षण व्यवस्था में तथाकथित बदलाव की खबरों के बीच पूरे प्रदेश में अफरातफरी फैल गयी। इसके बाद देर रात्रि प्रदेश के महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. वीएन त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि प्राइवेट मेडिकल कालेजों में पहले से ही आरक्षण की व्यवस्था नहीं थी। इसलिए इसे खत्म करने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को भ्रम हो गया है कि इस बार प्रदेश सरकार नीट की काउंसिलिंग करा रही है इसलिए प्राइवेट कालेजों में भी आरक्षण मिलेगा। जबकि प्राइवेट कालेजों में पीजी में कोई कोटा है ही नहीं।

10 मार्च के आदेश से फैला भ्रम
प्राइवेट कालेजों में भ्रम की स्थिति चिकित्सा शिक्षा विभाग के 10 मार्च के उस आदेश के बाद हुई जिसमें पीजी सीटों में दाखिले के लिए नीति निर्धारित की गयी है। इसमें अपर मुख्य सचिव डॉ. अनीता जैन भटनागर ने स्पष्ट किया था कि बिंदु सात के तहत निजी क्षेत्र के कालेजों में किसी भी प्रकार का आरक्षण अनुमन्य नहीं होगा। इस आदेश के बाद ही भ्रम फैल गया।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
पीजी मेडिकल सीटों में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की ही तरह निजी मेडिकल कॉलेजों में भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। इस बारे में पत्रिका ने एक्सपर्ट की राय जानने की कोशिश की तो अलग-अलग बातें सामने आयीं।
न हो कोटा
आईएमए लखनऊ के प्रेसीडेंट डॉ. पीके गुप्ता का कहना है कि निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों का कांसेप्ट अलग है। यहां आरक्षण की व्यवस्था कभी नहीं रही। लेकिन मेरी व्यक्तिगत राय है कि पीजी कोर्स में आरक्षण व्यवस्था नहीं होनी चाहिए। क्योंकि यह स्पेशलाइज्ड कोर्स हैं।
कोटा लागू हो
पीएमएस एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अशोक यादव ने कहा कि 2001 के पहले निजी कॉलेज बहुत कम थे। इसके बाद तेजी से इनकी संख्या में बढ़ोत्तरी हुई। जब ये राज्य सरकार और केंद्र सरकार के मानकों के हिसाब से चलते हैं तो इनमें भी सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की तरह आरक्षण की व्यवस्था लागू होनी चाहिए और फीस भी निर्धारित की जानी चाहिए। 

सरकार को बदनाम करने की कोशिश
चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ. वीएन त्रिपाठी का कहना है कि पीजी कोर्सेज में आरक्षण की व्यवस्था कभी भी निजी प्राइवेट और डेंटल कॉलेजों में लागू नहीं थी। ये केवल योगी सरकार को बदनाम करने की साजिश है। एमबीबीएस और बीडीएस के लिए भी निजी मेडिकल कॉलेजों में कोई कोटा नहीं है। न ही पूरे देश में ऐसा कोई राज्य है जहां ऐसी कोई व्यवस्था लागू हो।


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