हर्बल होंगी यूपी की सड़कें, राजकीय और राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगाए जाएंगे औषधीय पौधे

हर्बल होंगी यूपी की सड़कें, राजकीय और राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगाए जाएंगे औषधीय पौधे

Akansha Singh | Publish: Jun, 20 2019 01:42:42 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

प्रदेश को हरा भरा बनाने औऱ हवा को शुद्ध बनाने के लिये योगी सरकार राजकीय व राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे पौधे लगाएगी।

लखनऊ. प्रदेश को हरा भरा बनाने औऱ हवा को शुद्ध बनाने के लिये योगी सरकार राजकीय व राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे पौधे लगाएगी। इन पौधों में औषधीय आयुर्वेदिक पौधों का इस्तेमाल किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग संभालने वाले उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के अनुसार, उत्तर प्रदेश यह योजना लागू करने वाला पहला प्रदेश बनने की ओर अग्रसर है जो आयुष्मान भारत योजना का विस्तारित रूप है। यह परियोजना 18 जिलों में लांच की जाएगी। योजना का लक्ष्य घरों, कार्यालयों और पार्को में कैक्टी और बोनसाई जैसे विदेशी पौधों की वृद्धि को रोकना और औषधि विज्ञान के आयुर्वेद में बताए गए पौधों को बढ़ावा देना है। परियोजना को शुरुआती तौर पर सहारनपुर में दिल्ली-यमुनोत्री राजमार्ग संख्या 57 पर, वाराणसी में आशापुर-सारनाथ मार्ग पर, अयोध्या में पंचकोसी परिक्रमा मार्ग पर, गोरखपुर-देवरिया मार्ग पर, केशवधाम होते हुए अलीगढ़-मथुरा राजमार्ग पर और चित्रकूट में बांदा-बहराइच राजमार्ग पर पहले ही लागू कर दिया गया है।

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इन पौधों का होगा इस्तेमाल

लोक निर्माण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राजमार्ग के दोनों तरफ उगाने के लिए जिन 34 औषधियों को चुना गया है उनमें भोजन बनाने के लिए उपयोग में लाई जाने वाली और बैक्टीरिया रोधी गुणों के लिए मशहूर हल्दी शामिल है। साथ ही ब्राह्मी, अश्वगंधा, अनंतमूल, जनोफा, माशपर्णी, सप्तपर्णी, तुलसी और जल मीम जैसे तत्वों के पौधे लगाए जाने हैं। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, ब्राह्मी से स्मरणशक्ति तेज होती है और अश्वगंधा का उपयोग स्वस्थ रहने, अवसाद और हाई ब्लड प्रेशर से लड़ने में किया जाता है।

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सड़कों के किनारे पौधे लगाना कहलाता है मार्ग वृक्षपालन

मार्ग वृक्षपालन के अंतर्गत सड़कों के किनारे वृक्ष लगाना और फिर उनका अनुरक्षण करना आता है। वृक्ष विज्ञान से इसका सीधा संबंध है। मार्ग वृक्षपालन के लिए वृक्षों की वृद्धि और उनकी क्रिया-प्रणाली संबंधी ज्ञान तो अनिवार्यत: आवश्यक है ही, साथ ही साथ सजावट के उद्देश्य से, दृढ़ता के आधार पर, प्रतिरोधात्मक गुणों की दृष्टि से पौधों के चुनाव और समूहन संबंधी कौशल भी अपेक्षित हैं। इसलिए मार्ग वृक्षपालन का दायित्व निभाने के लिए पादप-क्रिया-प्रणाली, मृदा-विज्ञान, विकृति आदि का कामचलाऊ ज्ञान होना चाहिए।

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क्यों उगाए जाते हैं डिवाइडर पर पेड़ पौधे

सड़कों या डिवाइडर पर पेड़ लगाने इसलिए आवश्यक है क्योंकि पेड़ से ज्यादा प्रकाश को कोई नहीं रोक सकता है। हमेशा यह देखा गया है कि जब भी गाड़ियां रात को चलती है तो दूसरी तरफ से आने वाली गाड़ी पर प्रकाश सीधा-सीधा पड़ता है जिससे कि कई बार भीषण हादसा होने की संभावना होती है। इस वजह से प्रकाश को विभाजित करने के लिए डिवाइडर पर पेड़ लगाए जाते हैं। वहीं सड़कों पर आवारा पशु भी घूमते रहते हैं जिससे कि कई बार हादसे हो जाते हैं। हादसे को रोकने के लिए कांटेदार पेड़ लगाए जाते हैं जिससे कि जानवर सड़क को पार ना कर सके। वहीं इसका कारण प्रदूषण से बचना भी है।

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यूपी की 18 सड़कें ‘हर्बल मार्ग’ घोषित

आगरा में बिचपुरी-अछरेटा मार्ग, अलीगढ़ वाया मथुरा मार्ग के 8 किमी से सिगारपुर मार्ग, इलाहाबाद में रीवा रोड से पुराना यमुना पुल होते हुए डीपीएस-मिर्जापुर मार्ग, आजमगढ़ में कप्तानगंज महाराजगंज राजे सुल्तानपुर मार्ग, बरेली में बरेली-पीलीभीत बाईपास पर, फैजाबाद में पंचकोसी परिक्रमा (अयोध्या), देवीपाटन में सर्किट हाउस से अंबेडकर चौराहा, गोरखपुर में गोरखपुर-देवरिया मार्ग, बस्ती में बर्डपुर-पिपरहवा मार्ग, झांसी में एनएच-15 से बालाजी उन्नाव मार्ग पर, चित्रकूट धाम में बांदा-बहराइच मार्ग, कानपुर में मार्जिनल बांध से मन्धना तक, मेरठ में मेरठ-बड़ौत मार्ग, सहारनपुर में दिल्ली –यमुनोत्री राज्य मार्ग, मुरादाबाद में पुराना एनएच-24 पर, वाराणसी में आशापुर सारनाथ मार्ग, विंध्याचल में चील्ह गोपीगंज मार्ग, लखनऊ में बीकेटी से चन्द्रिका देवी मार्ग

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