सरकार ने लगाया किसानो को राहत का मरहम, जल्द मिलेगा नष्ट फसलों का मुआवजा

सरकार ने लगाया किसानो को राहत का मरहम, जल्द मिलेगा नष्ट फसलों का मुआवजा

Akanksha Singh | Publish: Feb, 15 2018 10:15:34 AM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

बुंदेलखंड के महोबा में दो दिन पूर्व हुई ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है।

महोबा. बुंदेलखंड के महोबा में दो दिन पूर्व हुई ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। प्रकृति के कहर से परेशान किसानों ने फसल मुआवजे की मांग को लेकर जिले के चारों ओर जोरदार प्रदर्शन कर शासन की नीद उड़ा दी है । 78 गांवों में चना, मटर, गेंहूँ की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गयी है । जिले के 1,45,631 किसानों में प्रधामनंत्री फसल बीमा योजना के तहत 90 हजार 571 किसान लाभान्वित होंगे । साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार से ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को बड़ी राहत के तौर पर 20,67,79300.00 की मदद की मांग की गयी है ।

महोबा जिले की कुलपहाड़ ,चरखारी ओर महोबा की तीनों तहसीलों में हुई जबरजस्त ओलावृष्टि ने यहां के किसानों को बर्बाद कर दिया है । जिले 158 गांवों में बर्फबारी ने फसलों को उजाडकार रख दिया है । खेतों पर कड़ी मेहनत के बाद किसानों की अच्छी फसल पूरी तरह तबाह हो गयी है । प्रदेश में साल दर साल सूखे, ओलावृष्टि ओर अतिवर्षा से सबक लेते हुए जिले के 1 लाख 45 हजार 631 किसानों में से महज 90 हजार 571 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा कराया था । जिले में कुल बीमित क्षेत्रफल 88 हजार 282 हेक्टेयर का है । जिसमे किसानों ने फसल प्रीमियम के तौर पर 33 करोड़ 781 लाख 247 हजार की राशि जमा की थी । जिले में किसानों की हालत बेहद खराब है । ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा प्रभावित सिंचित क्षेत्रफल में 14 हजार 503 एवं असिंचित 1616 हेक्टेयर में क्षति हुई है। कुलपहाड़ तहसील क्षेत्र में कुल 97 ग्राम ,चरखारी तहसील में 33 ग्राम ओर महोबा तहसील 28 ग्राम ओलावृष्टि से प्रभावित हुए है । शासन से किसानों को फसल राहत देने को लेकर 20 करोड़ 67 लाख 793 हजार की सहायता राशि की मांग की गई है । तो वही प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा कराने में पहला स्थान रखने वाले महोबा जिले के किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना कराने का भी भरपूर लाभ मिलेगा ।


प्राकृतिक और दैवीय आपदा से हम सब किसान हर वर्ष बुरी तरह प्रभावित होते चले आ रहे है । सरकार किसानों को राहत राशि के रूप में करोड़ो की राहत देने का एलान करती है । मगर सरकार की असहायता हम किसानों तक सही मायने में नही पहुंच पाती ।सरकार की राहत राशि पाने के लिए किसान लेखपालों को सरकार की चौखटों पर भटकने को मजबूर रहते है हम किसानों को दो दिन पूर्व आसमान से बरसी कयामत ने सफेद पत्थरो की चादर से ढक कर बर्बाद कर दिया है ।अब ऐसे में सरकार की मदद न मिली तो हम किसानों के सामने आत्महत्या करने के अलावा कोई दूसरा कदम नही होगा ।

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