दुनियावी रोशनी नहीं, हौसले के सहारे जीवन की छलांग

Motivational Story: यदि हौसला मजबूत हो, तो हर काम में सफलता का परचम लहराया जा सकता है। ऐसा ही एक उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं गरियाबंद के बरभाटा गांव की रहने वालीं 30 वर्षीय दृष्टिहीन प्रीति यादव।

By: Deovrat Singh

Published: 16 Sep 2021, 08:45 AM IST

Motivational Story: यदि हौसला मजबूत हो, तो हर काम में सफलता का परचम लहराया जा सकता है। ऐसा ही एक उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं गरियाबंद के बरभाटा गांव की रहने वालीं 30 वर्षीय दृष्टिहीन प्रीति यादव। प्रीति ने कभी दिन-रात नहीं देखे, लेकिन अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से लॉन्ग जम्प और गोला फेेंक में कई मेडल जीत चुकी हैं। वह अब इंटरनेशनल खेलने की तैयारी में जुटी हैं। प्रीति की सफलता का सफर अभावों के बीच से निकला है। आज वह दृष्टिहीन बच्चों को पढ़ाने के साथ ही उन्हें खेलों के लिए प्रोत्साहित भी कर रही हैं।

ओपन स्कूल के जरिए 12वीं तक पढऩे वाली प्रीति ने स्पेशल एजुकेशन में डिप्लोमा भी किया है। अब वह शिक्षिका बनकर घर की जिम्मेदारियां उठाने के साथ ही खेल की तैयारी भी कर रही हैं। प्रीति के मेंटर निरंजन साहू बताते हैं कि गरियाबंद जिले के बधिर बच्चों को ट्रेनिंग देने के दौरान प्रीति से मुलाकात हुई। खेल के प्रति उसकी लगन देख उसे खेल में आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित किया।

बचपन में सुने ताने, आज फक्र
प्रीति ने साल 2012 से लेकर 2018 तक लॉन्ग जम्प, गोला फेंक और दौड़ में कई पदक जीते। अब वह फरवरी, 2022 में दुबई में खेलने के लिए तैयारी कर रही हैं। प्रीति कहती हैं कि दृष्टि न होने के कारण बचपन में लोगों के बहुत ताने सुने, लेकिन वह किसी पर बोझ नहीं बनीं, बल्कि आगे बढऩे के लिए खुद को प्रेरित किया।

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