सरकार के इस नियम के लागू होने से पहले गोल्ड ज्वेलरी पर होगी डिस्काउंट की बरसात!

  • 15 जनवरी 2021 से हॉलमार्क गोल्ड ज्वेलरी होने जा रही है अनिवार्य
  • 15 जनवरी 2010 से गोल्ड हॉलमार्किंग अनिवार्यता की अधिसूचना जारी होगी
  • ज्वेलर्स को एक साल दिया गया है पुराना गोल्ड स्टॉक खत्म करने का समय

By: Saurabh Sharma

Updated: 04 Dec 2019, 07:54 AM IST

नई दिल्ली। देश के घरेलू सर्राफा बाजार ( bullion market ) की 15 जनवरी 2021 सूरत पूरी तरह से बदल जाएगी। इसका कारण है कि उक्त तारीख से देश में बिना हॉलमार्किंग की ज्वेलरी ( Jewelry Without Hallmarking ) नहीं बेची जा सकेगी। करीब एक महीने के बाद यानी 15 जनवरी 2020 को इससे संबंधित अधिसूचना भी जारी कर दी जाएगी। यानी ज्वेलर्स के पास पूरा एक साल होगा अपना पुरा स्टॉक बेचने का। इसके लिए सर्राफा व्यापारी ( bullion traders ) बिना हॉलमार्क वाली ज्वेलरी पर डिस्काउंट ( Discount on Jewelery without Hallmark ) ऑफर कर सकते हैं। नहीं तो व्यापारियों को ऐसी ज्वेलरी को पिघलाना होगा। जिससे व्यापारियों को मेकिंग चार्ज का नुकसान होगा।

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छोटे और ग्रामीण इलाकों में बेची जाती है नॉन हॉलमार्किंग ज्वेलरी
इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की मानें तो हॉलमार्किंग अनिवार्य होने के बाद जैसे ही डेट पास आएगी वैसे ही नॉन हॉलमार्किंग ज्वेलरी पर डिस्काउंट बढऩे की संभवना हो जाएगी। इससे सर्राफा व्यापारियों को नुकसान होगा। वास्तव में इस तरह का कारोबार छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में होता है। जहां पर हॉलमार्किंग के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है। इसी जागरुकता को बढ़ाने के लिए हॉलमार्किंग को अनिवार्य किया गया है। आपको बता दें कि बीआईएस ने गोल्ड ज्वेलरी के लिए 14 कैरट, 18 कैरट और 22 कैरट के तीन स्टैंडर्ड बनाए हैं।

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पिछले 50 फीसदी भी नहीं बिका हॉलमार्क गोल्ड
एसोसिएशन के अनुसार पिछले साल करीब 1000 टन सोने की खपत देश में हुई थी। जिसमें 450 टन सोना हॉलमार्क वाला था। आंकड़े साफ बता रहे हैं कि देश में आज भी हॉलमार्क सोने को लेकर लोगों में जागरुकता नहीं है। जानकारों का कहना है कि हॉलमार्किंग सेंटर्स को देश के सभी हिस्सों तक पहुंचाने की जरूरत है। देश में लगभग तीन लाख जूलर्स हैं और इनमें से अभी केवल 30,000 जूलर्स के पास हॉलमार्क वाली जूलरी बेचने के लिए बीआईएस का लाइसेंस है।

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