कश्मीरियों का दर्द : लॉकडाउन में दुनियाभर के बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे थे हमारे बच्चे घर बैठे थे

  • अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी कहीं कुछ नहीं बदला
  • प्रतिवर्ष कश्मीरी शॉल और गर्म कपड़े बेचने आते हैं युवक
  • मोदी राज में कश्मीरियों को मिली आतंकवाद से निजात

By: shivmani tyagi

Updated: 23 Jan 2021, 12:53 PM IST

केपी त्रिपाठी
मेरठ. ‘‘साहब ! अनुच्छेद 370 से गरीब कश्मीरियों को कोई लाभ नहीं था। इसके बारे में तो हमको ठीक से पता भी नहीं, हम तो बेरोजगार हैं। हमको वहीं रोजगार मिले तो हम यहां क्यों आएं। ठीक है अनुच्छेद -370 खत्म हो गया।

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यह कहना है सोपोर के बशीर अहमद का, जिसका अपना सेब का छोटा सा बाग़ान है लेकिन वह इस समय मेरठ में रिक्शा चलाकर कश्मीरी शॉल और गर्म कपड़े बेच रहे हैं। बशीर ग्रेजुएशन कर रहे हैं, उनका कहना है कि हमकों अनुच्छेद-370 से कोई मतलब नहीं है, हमकों तो रोजगार चाहिए। बशीर के साथ चल रहे अशरफ ने बताया कि उनके पांच बच्चे हैं लॉक डाउन ( lockdown ) के बाद से हालात और खराब हो गए हैं। हम यहां हर साल आते हैं लेकिन इस बार यहां भी धंधा मंदा है।

बोले कि, मोदी सरकार ने बोला था कि अनुच्छेद-370 खत्म होने के बाद रोजगार मिलेगा लेकिन उसके बाद से तो घाटी के हालत और खराब हो गए हैं। देश के दूसरे हिस्सों में आनलाइन पढ़ाई ( online class ) हो रही थी उनके बच्चे ( Kashmiri students ) घर में अपनी किताबें लेकर बैठे थे कि कब ऑनलाइन क्लास शुरू हो लेकिन ऑनलाइन क्लास कहां से शुरू होती जब घाटी के मोबाइल नेटवर्क ही जाम कर दिए गए थे।

मोदी के आने के बाद कम हुआ घाटी में आतंकवाद
बारामूला के अकरम मलिक कहते हैं कि मोदी के आने से घाटी में आतंकवाद बहुत कम हो गया है। पार से आने वाले लोगों के बारे में एक सूचना पर फौज की बटालियन पहुंच जाती है। पहले अपने ही गांव में दहशत में जीते थे लेकिन अब बच्चे भी खेलते हैं और गांव की दुकानें भी खुलती हैं। अकरम ने बताया कि पार से अब लोगों का आना बंद हो गया है। फौज के अलावा कुछ स्वंयसेवी संस्थाओं की मदद से गांव की महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है जिससे थोड़ी मदद मिल रही है।

हम हिंदुस्तानी हैं और रहेंगे
अकरम के अलावा रफीक, अमानुल और जिशान नामक युवक का कहना है कि कश्मीर के युवकों को रोजगार चाहिए। अगर रोजगार मिलेगा तो हम क्यों हिन्दुस्तान के दूसरे शहरों में जाएंगे। मोदी सरकार ( Modi government )
कश्मीर के युवकों को रोजगार उपलब्ध कराए। हम हिंदुस्तानी हैं हमसे हमारी पहचान न पूछी जाए। सियासत में क्या हो रहा है इससे हमको मतलब नहीं। घाटी का विकास हो और वहां पर हमारे बच्चों के लिए पढ़ाई की बेहतर सुविधा मिले हमको कश्मीरी नहीं हिन्दुस्तानी कहा जाए।

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