Teachers Day Special: इस मुस्लिम शिक्षिका के स्‍कूल में एडमिशन के लिए लगती है बच्‍चों की लंबी लाइन

  • Meerut के प्राथमिक विद्यालय फफूंडा के प्रिंसिपल हैं कौसर जहां
  • स्‍कूल के बच्‍चे बोलते हैं फर्राटेदार अंग्रेजी की गिनती और पहाड़े
  • राज्य शिक्षक पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है कौसर जहां को

By: sharad asthana

Updated: 04 Sep 2019, 03:14 PM IST

मेरठ। 5 सितंबर को पूरे देश में टीचर्स डे ( teachers day ) मनाया जाता है। इस मौके पर हम उन शिक्षकों का सम्‍मान करते हैं, जिन्‍होंने स्‍कूलों की तस्‍वीर बदल दी। इन्‍हीं में से एक नाम है कौसर जहां का। कौसर जहां मेरठ ( Meerut ) के प्राथमिक विद्यालय फफूंडा के प्रिंसिपल हैं। उनके स्‍कूल में एडमिशन लेने के लिए बच्‍चों की लंबी लाइन लगती है। पिछले साल तो यहां पर नो एडमिशन का बोर्ड लगाना पड़ा था।

मेरठ की रहने वाली है कौसर

कौसर जहां मेरठ की रहने वाली हैं। उनके स्‍कूल के बच्‍चे फर्राटेदार अंग्रेजी की गिनती और पहाड़ा बोलते हैं। स्‍कूल में अंग्रेजी के साथ ही हिंदी बोलनी भी जरूरी है। उनका स्‍कूल किसी प्राइवेट स्‍कूल की तरह लगता है। उनका सपना है कि सरकारी स्कूल के बच्चे भी प्राइवेट स्कूल के बच्चों के साथ खड़े हो सकें। उनके इस बेहतरीन कार्य के लिए उनको राज्य शिक्षक पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

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बेस्ट प्रेक्टिसेज की किताब में मिला स्‍थान

बेसिक शिक्षा परिषद बेस्ट प्रेक्टिसेज की किताब तैयार कर रहा है। इसमें सीमित संसाधनों में बेहतरीन शिक्षा देने वाले शिक्षकों को शामिल किया गया है। इसमें उनके अनुभवों को स्‍थान दिया गया है। प्रदेश के 36 शिक्षकों में से एक नाम कौसर जहां का भी है। इस स्‍कूल को भी बेस्ट प्रेक्टिसेज की किताब में जगह मिली है। स्‍कूल में आने वाले बच्‍चों का कहना है क‍ि यहां उनको खेल-खेल में पढ़ाई कराई जाती है।

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यह कहा था कौसर जहां ने

पिछले साल कौसर जहां ने राज्य शिक्षक पुरस्कार मिलने से पहले कहा था कि वह चाहती हैं कि सरकारी स्कूलाें पर लगा घटिया शैक्षिक व्यवस्था का लेवल हट जाए। सरकारी स्‍कूलों की इन बिगड़ी तस्‍वीरों के लिए उन्‍होंने खुद शिक्षकों को जिम्‍मेदार ठहराया था। उनका कहना था कि ये स्कूल हमारे हैं। इनकी नाकामी भी हमारी हो होगी।

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