बड़ी सफलता: बुढ़ापा होगा आपसे दूर, खुलकर बोल सकेंगे- अभी तो मैं जवान हूं

Highlights.

- वैज्ञानिकों ने खोजा बुढ़ापा लाने वाला जीन और इसे रोकने की प्रक्रिया

- मैनसेक्यमाल स्टेम सेल का दवाओं और उपचार से होगा। सेल्युलर री-प्रोग्रामिंग की जाएग

- स्टेम सेल मैग्जीन में प्रकाशित वैज्ञानिकों की इस नवीन खोज से जल्द ही बड़े बदलाव आने की उम्मीद है

 

नई दिल्ली.

जवानी नींद भर सोया और बुढ़ापा देख कर रोया। लेकिन अब बुढ़ापा आपको छू भी नहीं पाए और आप खुलकर बोल सकेंगे कि अभी तो मैं जवान हूं।

जी हां, वैज्ञानिकों ने उस जीन की खोज कर ली है जो शरीर में बुढ़ापा लाता है। साथ ही वैज्ञानिकों ने उस प्रक्रिया का भी सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया है जिसके द्वारा शरीर में बुढ़ापे को धीमा कर दिया जाएगा। स्टेम सेल मैग्जीन में प्रकाशित वैज्ञानिकों की इस नवीन खोज से जल्द ही बड़े बदलाव आने की उम्मीद है।

सेल्युलर री-प्रोग्रामिंग से होगा कायाकल्प

यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन के डॉ. वॉन जू ली के अनुसार बुढ़ापा दरअसल मैनसेयमाल स्टेम सेल (एमएससी) की गतिविधियों और कार्यप्रणाली में आने वाली कमी होती है। अब नए शोध से एमएससी के दवाओं और अन्य उपचार के माध्यम से बुढ़ापे को दूर किया जा सकेगा। इसके लिए सेल्युलर (कोशिका) री-प्रोग्रामिंग की जाएगी।

शरीर के जोड़ों में छिपा है राज

घुटनों व कोहनी के सनोविअल फ्लूड से एमएससी को री-प्रोग्राम कर प्लूरीपोटेंट स्टेम सेल (पीएसएस) में डाल देते हैं। फिर पीएसएस में युवा हुए स्टेम सेल को एमएससी में डाल दिया जाता है। री-प्रोग्रामिंग एमएससी से उम्र बढ़ाने की प्रकिया धीमी होती है।

इस तरह खोजा बुढ़ापे का जीन

वैज्ञानिकों ने जीएटीए6 को पहचाना जो कि हमारे दिल, आंत और फेफड़ों के विकास में सहायक होता है। वैज्ञानिकों ने शोध के जरिए शरीर में उम्र बढऩे के लिए जिम्मेदार जीन की खोज की जिसे जीएटीए4/एएचएच/एफओएस1 जीन का नाम दिया गया। डॉ. ली के अनुसार अब वैज्ञानिक इस जीन को री-प्रोग्राम करना जानते हैं।

इजरायली वैज्ञानिकों ने बदले गुणसूत्र

मानव शरीर में बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करने की दिशा में हाल में इजरायली वैज्ञानिकों ने दूसरी प्रक्रिया का सहारा लिया। उन्होंने मानव गुणसूत्रों (क्रोमोसो्म) के सिरों पर मौजूद टेलोमेयर की लंबाई को कम कर दिया। इन वैज्ञानिको का दावा है कि गुणसूत्रों के सिरों पर बुढ़ापा लाने वाले जीन होते हैं।

Ashutosh Pathak
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