NEP2020: आईआईटी में कला-मानविकी की पढ़ाई और कॉलेजों की फीस फिक्स, M.Phil खत्म समेत हर जानकारी

  • एजुकेशन में बदलाव के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ( Modi Cabinet ) ने दी नई शिक्षा नीति 2020 ( National Education Policy 2020 ) को मंजूरी।
  • आईआईटी ( indian institute of technology ) में कला ( arts courses )-मानविकी ( Humanities studies ), विदेशी संस्थानों ( Foreign universities ) के कैंपस को मंजूरी
  • उच्च शिक्षण संस्थानों ( higher education institutions ) की स्वायत्तता और बहु-विषयक ( multi-disciplinary courses ) संस्थानों पर फोकस।

 

नई दिल्ली। कई दशकों बाद मोदी कैबिनेट ( Modi Cabinet ) ने बुधवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ( National Education Policy 2020 ) को मंजूरी देते हुए 21वीं सदी की शिक्षा प्रणाली अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। देश की शिक्षा नीति में 34 वर्षों बाद किए गए महत्वपूर्ण बदलाव का मकसद छात्रों की पढ़ाई में दिलचस्पी बढ़ाना, शोध को बढ़ावा देना, संस्थानों में फीस को नियमित करना और 2035 तक ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो ( Gross Enrollment Ratio ) को 50 फीसदी करना है। जानिए उच्च शिक्षण संस्थानों ( higher education institutions ), विश्वविद्यालयों के लिए क्या हैं इस नई शिक्षा नीति ( New National Education Policy ) की प्रमुख बातें:

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भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों ( Foreign universities ) के कैंपस की स्थापना: नई शिक्षा नीति के तहत दुनिया के 100 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस संचालित करने के लिए सुविधा दी जाएगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के दस्तावेज़ की मानें तो नीति की मुख्य विशेषताओं को सूचीबद्ध करते हुए, "ऐसे (विदेशी) विश्वविद्यालयों को भारत के अन्य स्वायत्त संस्थानों के साथ नियामक, शासन और सामग्री मानदंडों के बारे में विशेष व्यवस्था दी जाएगी।"

IIT से समग्र दृष्टिकोण अपनाने को कहा: यहां तक कि आईआईटी ( indian institute of technology ) जैसे इंजीनियरिंग संस्थान कला ( arts courses ), मानविकी ( Humanities studies ) के साथ समग्र और बहु-विषयक शिक्षा की ओर आगे बढ़ेंगे। कला और मानविकी के छात्रों के लिए अधिक विज्ञान सीखने का लक्ष्य रखा जाएगा। इसमें व्यावसायिक विषयों और सॉफ्ट स्किल्स को शामिल करने का भी प्रयास किया जाएगा।

संगीत, कला और साहित्य सभी कॉलेजों में पढ़ाया जाएगा: भाषा, साहित्य, संगीत, दर्शन, कला, नृत्य, रंगमंच, शिक्षा, गणित, सांख्यिकी, प्योर और अप्लाइड साइंसेज, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, खेल, अनुवाद और इंटरप्रिटेशन जैसे कई विभागों को सभी उच्च शिक्षा संस्थानों के रूप में स्थापित और मजबूत किया जाएगा।

सभी संस्थान रिसर्च इंस्टीट्यूट होंगे: वर्ष 2040 तक सभी उच्च शिक्षा संस्थान (HEI) का उद्देश्य बहु-विषयक संस्थान बनना होगा, जिनमें से हरेक का लक्ष्य 3,000 या इससे अधिक छात्र होंगे।

स्नातक कॉलेजों अधिक स्वायत्तः स्नातक कॉलेजों को अकादमिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता दी जाएगी। कॉलेजों को उनकी मान्यता के आधार पर यह स्वायत्तता दी जाएगी। भारत में 45,000 से अधिक संबद्ध कॉलेज हैं।

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सभी कॉलेजों के लिए एक प्रवेश परीक्षा: सभी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए आम प्रवेश परीक्षा एनटीए द्वारा आयोजित की जाएगी। परीक्षा वैकल्पिक होगी और अनिवार्य नहीं।

शिक्षक, साथियों द्वारा मूल्यांकन के लिए रिपोर्ट कार्ड: हर साल जीवन कौशल सिखाया जाएगा। रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा शिक्षकों, साथियों और छात्रों द्वारा भी की जाएगी। प्रदर्शन के मूल्यांकन की समीक्षा होगी। छात्रों की पढ़ाई के प्रत्येक वर्ष का एआई-आधारित (आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस ) मूल्यांकन होगा।

क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होंगे ई-पाठ्यक्रम: शिक्षा योजना, शिक्षण, सीखना, मूल्यांकन, शिक्षक, स्कूल और छात्र प्रशिक्षण का हिस्सा तकनीकी होगी। क्षेत्रीय भाषाओं में ई-सामग्री उपलब्ध होगी। हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध ई-पाठ्यक्रमों में कन्नड़, ओडिया, बंगाली के साथ आठ भाषाएं होंगी।

कॉलेजों में इंटरडिसिप्लिनरी कोर्सेज: एकल उच्च शिक्षा संस्थान और व्यावसायिक शिक्षा संस्थान बहु-विषयक शैक्षिक संस्थान के रूप में विकसित किए जाएंगे। वंचित क्षेत्रों के लिए विशेष शिक्षा क्षेत्र होंगे। ऑनलाइन ज्ञान प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी मंच की स्थापना की जाएगी।

शिक्षा को जीडीपी का 6 फीसदी हिस्सा: जल्द ही शिक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश जीडीपी का 6 फीसदी तक पहुंचाया जाएगा। फिलहाल यह राज्य और केंद्र सरकार समेत लगभग 4.43 फीसदी है।

फीस को निर्धारित किया जाएगा: न केवल पाठ्यक्रम बल्कि विश्वविद्यालयों को बहु-विषयक किया जाएगा। सार्वजनिक और निजी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए सामान्य मानदंड होंगे। इसका मतलब यह है कि नियामक ढांचे के भीतर शुल्क तय किया जाएगा और अधिकतम निर्धारित शुल्क से ज्यादा फीस नहीं ली जा सकेगी।

एमफिल बंद: एमफिल को बंद किया जाएगा। रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए एमफिल की अनुमति नहीं होगी। स्नातक, परास्नातक और पीएचडी में सभी पाठ्यक्रम बहु-विषयक होंगे।

2030 तक हर जिले में एक विशाल बहु-विषयक महाविद्यालयः 2040 तक सभी उच्च शिक्षा संस्थान का उद्देश्य बहु-विषयक संस्थान बनना होगा, जिनमें से प्रत्येक का लक्ष्य 3,000 या अधिक छात्र होंगे। 2030 तक हर जिले में या उसके पास कम से कम एक विशाल बहु-विषयक ( multi-disciplinary courses ) उच्च शिक्षण संस्थान होगा। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा में व्यावसायिक शिक्षा समेत सकल नामांकन अनुपात को बढ़ाना होगा। इसे मौजूदा 26.3 फीसदी (2018) से बढ़ाकर 2035 तक 50 फीसदी किया जाएगा।

संस्कृत को मुख्य धारा में लानाः संस्कृत को स्कूल में मजबूती के साथ मुख्यधारा में लाया जाएगा। तीन-भाषा सूत्र में भाषा के विकल्पों में से यह एक होगी और उच्च शिक्षा भी शामिल होगी। संस्कृत विश्वविद्यालय भी उच्च शिक्षा के बड़े बहु-विषयक संस्थान बनने की ओर अग्रसर होंगे।

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अमित कुमार बाजपेयी
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