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श्रमिकों के \"पसीने\" का नहीं हिसाब-किताब!

पाली। कहावत है मजदूर की मजदूरी पसीना सूखने से पहले मिल जानी चाहिए, लेकिन किसी श्रमिक...

पाली

Updated: January 16, 2015 11:59:19 am

पाली। कहावत है मजदूर की मजदूरी पसीना सूखने से पहले मिल जानी चाहिए, लेकिन किसी श्रमिक के "पसीने" का हिसाब-किताब ही नहीं हो तब। यही हालात जिले में कार्य करने वाले ऎसे श्रमिकों के हैं, जिनको औद्योगिक इकाइयां सीधे नियोजित नहीं दर्शाती।

इनमें से अधिकांश ऎसे श्रमिक हैं जो कि टैक्सटाइल व मेहंदी जैसे उद्योगों से जुड़े हैं। मजदूर दिवस पर वैसे तो मजदूरों के हक की कई बातें होती हैं, लेकिन उनका वास्तविक हक जो उनके वजूद को लेकर है, उस ओर कोई ध्यान देता ही नहीं। उद्योगों पर जब संकट आता है तो अकेले टैक्सटाइल के उद्यमी 25 हजार से अधिक श्रमिकों के रोजगार पर संकट बताते हैं, लेकिन जब सुविधाएं देने की बात आती है तो यही संख्या आधी हो जाती है। जिला प्रशासन के आंकड़े तो यही दर्शाते हैं। औद्योगिक इकाइयों में हावी ठेका प्रथा के कारण हजारों श्रमिकों को गिना ही नहीं जाता।

यह है बड़ा फेर
जिले में अकेले टैक्सटाइल उद्योग में 25 हजार से श्रमिकों के नियोजित होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इनकी संख्या मात्र 9036 ही है।
इसी प्रकार लैदर इण्डस्ट्री एवं मिनरल इण्डस्ट्री में क्रमश: 5423 और 4580 श्रमिक दर्शाए गए हैं, जबकि इनकी वास्तविक संख्या काफी अधिक है। निर्माण कार्य को छोड़कर अन्य प्रकार के श्रमिकों को सरकार की ओर किसी प्रकार से लाभान्वित नहीं किया जाता। ईएसआई एवं अन्य प्रकार की मेडिकल सुविधाएं भी सिर्फ उन्हीं श्रमिकों को मिलती है जिनको औद्योगिक इकाई में सीधा नियोजित दर्शाया जाता है।

यह हैं आंकड़े
जिले में कुल औद्योगिक इकाइयां 8675
जिले में कुल श्रमिक नियोजित 33555
संनिर्माण कार्य में लगे श्रमिक 6795
(आंकड़े जिला प्रशासन की वेबसाइट व श्रम विभाग के अनुसार)

श्रमिकों के लिए योजनाएं
इस मण्डल में उनको लाभांवित किया जाता है, जिन्होंने 1 वष्ाü में कम से कम 90 दिन भवन व अन्य संनिर्माण जैसे आरसीसी कार्य, सुथारी कार्य, लुहारी कार्य, पेंटर, प्लम्बर, इलेक्ट्रीशियन, सैनेट्री कार्य किए हों। उनके लिए 11 प्रकार की योजनाएं हैं।

दुर्घटना पर तत्काल सहायता योजना- समूह बीमा योजना
शिक्षा सहायता योजना
प्रसूति सहायता योजना
मृत्यु की दशा में अंत्येष्टि सहायता एवं अनुग्रह भुगतान योजना
पुत्री-महिला हिताधिकारी के स्वयं के विवाह सहायता योजना
मेधावी विद्यार्थियों को नकद पुरस्कार
गंभीर बीमारियों पर व्यय पुनर्भरण योजना
निजी आवास निर्माण ऋण पर आर्थिक सहायता
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना
नि:शुल्क साइकिल सहायता योजना

ठेके के श्रमिकों की नहीं जानकारी
श्रम विभाग भवन निर्माण एवं अन्य संनिर्माण कार्य में लगे श्रमिकों के लिए तो योजना चलाता है, लेकिन अन्य श्रमिकों के लिए नहीं है। इसलिए उनका पंजीयन नहीं हो पाता। ठेके पर काम करने वाले श्रमिकों की कोई जानकारी नहीं होती।
संगीता सिंह, सहायक श्रम आयुक्त, श्रम विभाग, पाली

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