SANT Missile के सफल परीक्षण के साथ ही भारत ने 46 दिन में छोड़ी 13 मिसाइलें

  • भारत ने सोमवार को ओडिशा के तट से किया संत मिसाइल ( SANT Missile ) का सफल परीक्षण।
  • रविवार को ही आईएनएस चेन्नई से किया था ब्रह्मोस मिसाइल के नौसैनिक संस्करण का परीक्षण।
  • बीते सात सितंबर से लेकर अब तक भारत कर चुका है बेहद खतरनाक 13 मिसाइलों की टेस्टिंग।

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी चीन के साथ सीमा विवाद के बीच भारत अपने शौर्य का प्रदर्शन करना बरकरार रखे हुए है। इस कड़ी में भारत ने सोमवार को ओडिशा के तट से दूर एंटी-टैंक ( SANT Missile ) मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इस मिसाइल के साथ ही भारत ने बीते 7 सितंबर से अब तक यानी 46 दिनों में 13 मिसाइलों का परीक्षण किया है।

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सूत्रों के मुताबिक रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ( DRDO ) द्वारा सोमवार को जिस संत मिसाइल का परीक्षण किया गया है, वो भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए विकसित की जा रही है। इस अत्याधुनिक मिसाइल में लॉन्चिंग से पहले लॉक-ऑन और लॉन्चिंग के बाद में भी लॉक-ऑन क्षमता होगी।

दूसरी ओर वायु सेना ने रविवार को डीआरडीओ को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के सफल परीक्षण-फायरिंग के लिए बधाई दी। डीआरडीओ ने कहा कि ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का भारतीय नौसेना के स्वदेश निर्मित स्टेल्थ डिस्ट्रॉयर आईएनएस चेन्नई से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।

आइए जानते हैं भारत ने बीते 46 दिनों में कौन सी खूबियों वाली मिसाइलों का परीक्षण किया हैः

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  1. 18 अक्टूबर को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का एक नौसेना संस्करण, स्वदेश निर्मित आईएनएस चेन्नई से फायर किया गया।
  2. 16 अक्टूबर को ओडिशा तट स्थित परीक्षण रेंज से सशस्त्र बलों के लिए एक यूजर ट्रायल के रूप में अपनी परमाणु-सक्षम पृथ्वी-2 मिसाइल का रात में परीक्षण सफलतापूर्वक किया। लिक्विड-प्रोपेल्ड यानी द्रव्य ईंधन द्वारा चलने वाली पृथ्वी-2 की रेंज 250 किलोमीटर है और यह 1 टन का वारहेड ले जा सकती है। यह 9-मीटर लंबी मिसाइल डीआरडीओ द्वारा इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत विकसित की गई है। सतह से सतह पर मार करने वाली यह भारत की पहली स्वदेशी रणनीतिक मिसाइल है।
  3. 10 अक्टूबर को भारत ने अपनी पहली स्वदेशी एंटी रेडिएशन मिसाइल रुद्रम-1 का सफल परीक्षण किया। यह जमीन पर दुश्मन के राडार का पता लगा सकती है।
  4. 5 अक्टूबर को भारत ने पनडुब्बी रोधी वारफेयरर विकसित किया है और स्वदेशी रूप से विकसित SMART टारपीडो प्रणाली का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। यह टारपीडो रेंज से परे एंटी-सबमरीन वारफेयर (ASW) के संचालन के लिए आवश्यक है।
  5. 3 अक्टूबर को भारत ने ओडिशा तट से परमाणु-सक्षम शौर्य मिसाइल के नए संस्करण का सफल परीक्षण किया।
  6. 1 अक्टूबर को लेजर-गाइडेड एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) महाराष्ट्र के अहमदनगर में एक MBT अर्जुन टैंक से दागी गई।
  7. 30 सितंबर को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की एक्सटेंडेड रेंज का ओडिशा में जमीनी केंद्र से परीक्षण किया गया।
  8. 27 सितंबर को डीआरडीओ ने परमाणु-सक्षम पृथ्वी-2 मिसाइल का सफलतापूर्वक रात्रि परीक्षण किया। 250 किलोमीटर रेंज वाली यह मिसाइल 1 टन का वारहेड ले जा सकती है। डीआरडीओ द्वारा इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत यह 9-मीटर लंबी मिसाइल विकसित की गई है। यह भारत की पहली सतह से सतह पर मार करने वाली स्वदेशी रणनीतिक मिसाइल है।
  9. 23 सितंबर को पृथ्वी-2 का परीक्षण ओडिशा के बालासोर से किया गया। यह एक स्वदेशी रूप से विकसित परमाणु सक्षम सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है जो DRDO के अनुसार अपने लक्ष्य को हिट करने के लिए पैंतरेबाज़ी के साथ एक एडवांस्ड इनर्शियल गाइडेंस सिस्टम का इस्तेमाल करती है।
  10. 23 सितंबर को DRDO ने महाराष्ट्र के अहमदनगर में स्वदेशी रूप से विकसित लेजर-गाइडेड एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का परीक्षण किया। DRDO के मुताबिक, "एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर यानी विशेष कवच (ERA) द्वारा संरक्षित" बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
  11. 22 सितंबर को ABHYAS - हाई-स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (HEAT) व्हीकल्सः का ओडिशा के तट से परीक्षण किया गया। इनका इस्तेमाल विभिन्न मिसाइल प्रणालियों के मूल्यांकन के लिए लक्ष्य के रूप में किया जा सकता है।
  12. 7 सितंबर को स्वदेशी रूप से विकसित हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्सट्रेटर व्हीकल (HSTDV) का परीक्षण ओडिशा के तट से किया गया। यह क्रूज मिसाइलों और लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के लिए आवश्यक है।
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अमित कुमार बाजपेयी
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