Kisan Andolan: दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर एक तरफ का रास्ता खुला, किसान बोले- हमने की पहल

किसान बीते छह महीने से तीन नए कृषि कानून के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे थे। बताया जा रहा है कि दिल्ली में गाजीपुर सीमा पर रविवार देर रात में ही गाजियाबाद जाने वाले रास्ते को खोलने को काम शुरू हो गया था।

 

नई दिल्ली।

देशभर में कोरोना वायरस (Coronavirus) के बढ़ते संक्रमण के बीच दिल्ली-यूपी की सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने वहां से हटने का फैसला किया है। किसान बीते छह महीने से तीन नए कृषि कानून के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे थे। बताया जा रहा है कि दिल्ली में गाजीपुर सीमा पर रविवार देर रात में ही गाजियाबाद जाने वाले रास्ते को खोलने को काम शुरू हो गया था।

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यही नहीं पुलिस ने दिल्ली-मेरठ हाइवे पर लगी बैरिकेडिंग को भी हटा लिया है। हालांकि, कोई अधिकारी इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा है। दूसरी ओर किसानों के मुताबिक, हमारे कहने पर ही पुलिस ने इस रास्ते को खोला है। भारतीय किसान यूनियन यानी बीकेयू के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि दिल्ली पुलिस की ओर से दिल्ली से गाजियाबाद जाने वाले सडक़ की तीन लेन खोल दिया गया है। धर्मेंद्र ने बताया कि किसानों की पहल के बाद ही पुलिस ने यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन की वजह से लोगों को परेशानी हो रही थी, जिसकी वजह से कई दिनों से किसान प्रशासन से इस रास्ते को खोलने की मांग कर रहे थे। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर गाजियाबाद से दिल्ली की ओर जाने वाली पूरी सडक़ अभी बंद है और किसान यहां धरना दे रहे हैं। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि किसानों ने अगर पहल की है, तो सिर्फ तरफ के रास्ते को ही क्यों खुलवाया।

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इससे पहले बीकेयू के महासचिव युद्धवीर सिंह ने एक बड़ा बयान दिया था। उन्‍होंने बीते सोमवार को कहा था कि किसानों की संस्था 'BJP के खिलाफ नहीं' है और उत्तर प्रदेश के लोग अपना वोट जिसे चाहें, उस पार्टी को दे सकते हैं। बीकेयू नेता प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों के सिलसिले में बात कर रहे थे और उनके इस बयान के बाद कई तरह की क़यासों का दौर चल पड़ा है।

इस बयान को अजीब इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि भारतीय किसान यूनियन ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के दौरान कई सभाएं और प्रचार करते हुए लोगों के बीच जाकर पुरज़ोर अपील की कि वो भाजपा का बहिष्कार करें। साथ ही उत्तर प्रदेश में भी यूनियन ने नए कृषि कानूनों का विरोध करते हुए कई महापंचायतों का आयोजन किया।

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Ashutosh Pathak
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