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रोने पर सुनाई देती थी पंचम ध्वनि नाम ही पड़ गया पंचम दा

घर में संगीत का माहौल होने के कारण उनका भी रुझान संगीत की तरफ हो गया और वह अपने पिता से इसकी शिक्षा लेने लगे।

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Abha Sen

Jan 06, 2016

जबलपुर। आरडी बर्मन एक जाना पहचाना नाम है। वैसे तो इनका जन्म कोलकाता में हुआ था लेकिन इस महान संगीतकार के बेजोड़ संगीत को सुनने वालों की अब भी कमी नही है। आरडी बर्मन का संगीत अब भी घरों में सुनाई देता है।

आनंदजी, खय्याम सहित कई संगीतकारों का जबलपुर आगमन हो चुका है। किसी न किसी कार्यक्रम के सिलसिले में शहर आए इन संगीतकारों ने आरडी बर्मन का जिक्र करते हुए एक बार कहा था कि आरडी बर्मन का संगीत बेमिसाल है। उनके संगीत को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। आरडी बर्मन को प्रेरणा मानकर उनके संगीत की दुनिया में नाम कमाने कई प्रतिभाएं अब भी आगे बढ़ रही हैं। जबलपुर स्थित संगीत महाविद्यालय में भी आरडी बर्मन के संगीत का जब-तब सुनने मिलता है। इस महान संगीतकार के संबंध में हम आपको कुछ रोचक बातें बता रहे हैं-


बॉलीवुड में अपनी मधुर संगीत लहरियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले महान संगीतकार आर.डी.बर्मन आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन फिजाओं में उनका संगीत गूंजता रहता है। आर.डी. बर्मन का जन्म 27 जून 1939 को कोलकाता में हुआ था। उनके पिता एस.डी.बर्मन जाने-माने फिल्म संगीतकार थे। घर में संगीत का माहौल होने के कारण उनका भी रुझान संगीत की तरफ हो गया और वह अपने पिता से इसकी शिक्षा लेने लगे।


कहा जाता है कि बचपन में जब ये रोते थे तो पंचम सुर की ध्वनि सुनाई देती थी, जिसके चलते इन्हें पंचम कह कर पुकारा गया। कुछ लोगों के मुताबिक किशोर कुमार के भाई और अभिनेता अशोक कुमार ने जब पंचम को छोटी उम्र में रोते हुए सुना तो कहा कि ये पंचम में रोता है तब से उन्हें पंचम कहा जाने लगा। अपनी अद्वितीय सांगीतिक प्रतिभा के कारण इन्हें विश्व के सर्वश्रेष्ठ संगीतकारों में एक माना जाता है। 4 जनवरी 1994 मशहूर संगीतकार सचिन देव बर्मन व उनकी पत्नी मीरा की इकलौती संतान ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

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