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अब भाजपा में पार्षदों के बीच एक और जंग की तैयारी

- 58 भाजपा पार्षदों में अब हर कोई खुद को काबिल बताने में जुटा- अब गणेश परिक्रमा का दौर: शपथ ग्रहण से पहले निगम परिषद अध्यक्ष के लिए जोड़-तोड़- 25 से अधिक समितियों में नामित होंगे पार्षद

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अब भाजपा में पार्षदों के बीच एक और जंग की तैयारी

अब भाजपा में पार्षदों के बीच एक और जंग की तैयारी

भोपाल। महापौर और पार्षदों के परिणाम घोषित होने के बाद भले ही अभी शपथ ग्रहण में देरी हो लेकिन अब निगम परिषद अध्यक्ष समेत 25 से अधिक समितियों में शामिल होने की गणेश परिक्रमा शुरू हो गई है। निगम परिषद अध्यक्ष को महापौर की ही तरह राज्यमंत्री स्तर की दर्जा प्राप्त सुविधाएं मिलती हैं।

गाड़ी-बंगला के साथ ही मानदेय भी महापौर के बराबर ही होता है। इसलिए इस पद के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गयी है। निगम में भाजपा के सर्वाधिक 58 पार्षद हैं। इसलिए बहुमत के आधार पर भाजपा से ही अध्यक्ष बनेगा। दो बार या इससे अधिक बार के पार्षद इस पद के लिए दावेदारी कर रहे हैं। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय भाजपा की स्थानीय व राज्य समिति ही करेगी।

चयन के विकल्प बेहद कम
नगर निगम परिषद के लिए अनुभवी व वरिष्ठ चेहरों को लिया जाता है। भाजपा में इस समय 58 पार्षद में से तीन से चार ही ऐसे हैं, जिन्हें दो या इससे अधिक बार पार्षदी का मौका मिला है। ऐसे में वरिष्ठता के आधार पर अध्यक्ष चयन करने में विकल्प बेहद कम है।

19 जोन समितियां, 15 से अधिक अन्य समितियां : नगर निगम के 19 जोन की जोन समितियां बनेंगी। इसमें जोन वार्डों में से किसी एक को जोन अध्यक्ष बनाकर उसे संबंधित जोन के वार्डों को मिलाकर समिति अध्यक्ष बनाया जाएगा।

बढ़ सकती है सदस्यों की संख्या : महापौर परिषद के सदस्यों की संख्या में बढ़ सकती है। नगरीय प्रशासन स्तर पर 2014 में तय नियम लागू करने की कोशिश है। ऐसा हुआ तो 12 से 13 सदस्य हो सकते हैं।

परंपरा का हो पालन : चौहान
पूर्व निगम परिषद अध्यक्ष सुरजीत सिंह चौहान का कहना है कि पार्षद विभागों के प्रभारी होते हैं, लेकिन प्रभारी होने के नाम कई फाइलें उनसे पूछे बिना या उनकी दस्तखत के बिना ही आगे बढ़ जाती है। ये गलत परंपरा है, इसे इस बार लागू नहीं करना चाहिए।

इस तरह होगा महापौर परिषद का गठन
महापौर परिषद महापौर की मंशा के अनुसार बनेगी। इसमें दस सदस्य तक हो सकते हैं। इनमें से हर एक समिति का एक अध्यक्ष होगा। वित्त, पानी, महिला बाल विकास, खाद्य, बाजार, यांत्रिकी, स्वास्थ्य समेत दस समितियां बनेगीं। इसके अलावा स्थायी समिति, लोक लेखा, अपील समिति भी बनेगी।
जिला योजना में भी शामिल होंगे पार्षद : जिला योजना समिति में भी भाजपा और कांग्रेस पार्षद शामिल होंगे। ये जिला स्तर पर होगी, लेकिन यहां पार्षद अपने वार्ड और निगम को लेकर बात रख सकेंगे।

इधर, कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष पर मंथन
वहीं दूसरी ओर भोपाल में नगर सरकार के विपक्षी दल में नेता प्रतिपक्ष कौन होगा इस पर मंथन शुरू हो गए हैं। परिषद के पिछले दो कार्यकाल में नेता प्रतिपक्ष का जिम्मा संभाल रहे छह बार के पार्षद मोहम्मद सगीर फिर पार्षद बन गए हैं। अब कांग्रेस के सामने चुनौती है कि वह सगीर को ही ये जिम्मा दें या फिर किसी नए चेहरे को। कांग्रेस में अंदरूनी तौर पर महिला महापौर के सामने महिला नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग उठ रही है। हालांकि इसपर अंतिम निर्णय कांग्रेस पार्टी को करना है।
कांग्रेस ने मोहम्मद सगीर को इसबार पहली सूची में टिकट नहीं दिया था, लेकिन बाद में संसोधित सूची जारी कर वार्ड 41 से मोहम्मद सगीर को टिकट दे दिया गया। अब वरिष्ठता के आधार पर नेता प्रतिपक्ष बनाया जाए तो मोहम्मद सगीर पूरी परिषद में सबसे अधिक वरिष्ठ हैं।

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