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इस बार शुभ संयोग के साथ आयी है भगवान विष्णु और लक्ष्मी की कृपा दिलाने वाली एकादशी

इस बार इस एकादशी का महत्व बढ़ गया है। इस दिन चातुर्मास में शयन के दौरान भगवान विष्णु करवट बदलते है।

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vikram ahirwar

Sep 09, 2016

ratlam news

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रतलाम। इस वर्ष परिवर्तनी एकादशी जिसे पद्या ग्यारस भी कहते है, वह 13 सितंबर मंगलवार को आ रही है। मंगलवार विष्णु के अवतार श्री राम के परमभक्त वीर हनुमान का माना जाता है। इस बार इस एकादशी का महत्व बढ़ गया है।


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भगवान विष्णु करवट बदलते है
ज्योतिषी ओशोप्रिया ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार इस एकादशी को स्वयं देवी व देवता भी करते है। इसकी एक बड़ी वजह इस दिन चातुर्मास में शयन के दौरान भगवान विष्णु करवट बदलते है। इसलिए भाद्रमास की शुक्ल पक्ष को इस बार आ रही एकादशी का विशेष महत्व बढ़ गया है।


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शुक्ल पक्ष में आती है
यह एकादशी हर साल भाद्र मास में शुक्ल पक्ष को आती है। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु सहित देवी लक्ष्मी की पूजा करने से इस जीवन में धन और सुख की प्राप्ति तो होती ही है। परलोक में भी इस एकादशी के पुण्य से उत्तम स्थान मिलता है।

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पद्म पुराण में है बताया गया है महत्‍व
ज्योतिषी ओशोप्रिया ने बताया कि इस एकादशी के महत्व के बारे मे पुराणों में विशेष उल्लेख मिलता है कि भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए इस दिन स्वर्ग के देवी-देवता भी व्रत रखते हैं। पद्म पुराण में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि इस एकादशी के दिन विष्णु के वामन रूप की पूजा करनी चाहिए।


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पाताल में रहता निवास
इसका कारण यह है कि भगवान इन चार महीनों में वामन रूप में पाताल में निवास करते हैं। इसलिए विष्णु-लक्ष्मी सहित इस दिन वामन भगवान की भी पूजा करनी चाहिए।


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विष्णु चले गए थे पाताल
ज्योतिषी ओशोप्रिया ने बताया कि पुराणों में बताया गया है कि राजा बलि से जब भगवान विष्णु ने तीन पग में उनका सब कुछ ले लिया तब राजा बलि ने वामन रुप में भगवान विष्णु को पहचान लिया और उनसे वरदान मांगा कि आप भले ही मुझ से मेरा सब कुछ लीजिए लेकिन मेरे साथ पातल में चलकर निवास कीजिए।


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लक्ष्मी ने कराया था मुक्त
इसके बाद भगवपन विष्णु बलि के साथ पाताल में रहने चले गए। इसके बाद देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को पाताल से मुक्त करवाया। इसके बाद से भगवान विष्णु अपने वचन के अनुसार हर वर्ष चतुर्मास में पाताल में वामन रुप में निवास करते हैं


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मृत्‍यु के बाद भी काम आता है
ज्योतिषी ओशोप्रिया ने बताया कि पुराणों में उल्लेख किया गया है कि जो भी व्यक्ति परिवर्तनी एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु सहित लक्ष्मी और वामन भगवान की पूजा करते हैं उन्हें वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। इस पुण्य के फल से व्यक्ति को मृत्यु के बाद प्राप्त होने वाले कष्ट को नहीं भोगना पड़ता है।

भगवान श्री कृष्ण ने भी महत्व बताया
भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि जो व्यक्ति पद्मा एकादशी के दिन उनके वामन अवतार की पूजा करता है वह एक साथ ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की पूजा का फल प्राप्त कर लेते हैं। ऐसा व्यक्ति पृथ्वी लोक में यश और सम्मान प्राप्त करता है तथा मृत्यु के बाद स्वर्ग लोक में स्थान प्राप्त करके चन्द्रमा के समान चमकता है। पद्मा एकादशी के दिन जो भक्त कमल से वामन भगवान की पूजा करता है उसकी सभी मनोकामना पूरी होती है।

यह दान करे इस दिन
पद्मा एकादशी के विषय में शास्त्र कहता है कि इस दिन चावल, दही एवं चांदी का दान करना उत्तम फ लदायी होता है। जो लोग किसी कारणवश पद्मा एकादशी का व्रत नहीं कर पाते हैं उन्हें पद्मा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की कथा का पाठ करना चाहिए।

इन पाठ का है विशेष महत्व
विष्णु सहस्रनाम एवं रामायण का पाठ करना भी इस दिन उत्तम फ लदायी होता है। इसके अलावा दक्षिण भारत में इस दिन ललिता सहस्त्रनाम का पाठ किया जाता है व शहद का विशेष रूप से दान किया जाता है। इसदिन दान के समय किसी को साथ में रखने से पुण्य में कमी आती है।

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