जबलपुर। शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय के समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके और शाम के समय पश्चिम की ओर मुख करके सूर्यदेव को जल चढ़ाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि सूर्य को जल चढ़ाते समय गिरने वाले जल वज्र बनकर रोग का विनाश करते हैं। सूर्यदेव को जल चढ़ाने की परंपरा आज की नहीं बल्कि वैदिक काल से ही चली आ रही है। सूर्य की पूजा के बारे में भगवान राम की भी कथा मिलती है कि वह भी हर दिन सूर्य की पूजा और अर्घ्य दिया करते थे।
सूर्य सभी ग्रहों के राजा माने गए हैं। वेदों, उपनिषदों व धार्मिक ग्रंथों में सूर्यदेव के महिमा का वर्णन मिलता है। पुराणों में सूर्यदेव की उपासना को सभी रोगों को दूर करने वाला बताया गया है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार रविवार सूर्यदेव का दिन माना गया है। आइए जानते हैं सूर्य को जल चढ़ाने के क्या लाभ हैं....
1. यदि कारोबार, नौकरी आदि में परेशानी हो रही हो तो सूर्यदेव की उपासना से सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
2. जल चिकित्सा के अनुसार सूर्योदय के समय सूर्यदेव को सिर के ऊपर तांबा का पात्र में जल लेकर अर्पित करना चाहिए।
3. सूर्यदेव को जल अर्पित करे वक्त अपनी दृष्टि जलधारा के बीच में रखें, ताकि जल से छनकर सूर्य की किरणें आंखों के बीच में पड़े, इससे आंखों की रोशनी बढ़ती है।
4. सूर्यदेव को जल अर्पण से अन्य दोष भी दूर होत हैं। जैसे भोजल में बाल, कंकड़ इत्यादि मिलना। यदि ऐसा लंबे समय से जारी है सूर्य को जलअर्पित अवश्य करें।
5. यदि आपकी जन्मकुंडली में सूर्य ग्रह तुला में है तो अशुभ फल से बचने के लिए हर दिन सूर्यदेव को जल देना चाहिए। साथ ही, जिनकी कुंडली में सूर्यदेव अशुभ ग्रहों जैसे शनि, राहु-केतु के प्रभाव में है तो वैसे व्यक्ति को भी नियमपूर्वक सूर्यदेव को जल अर्पण करना चाहिए।