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हरी मिर्च के उत्पादन में कमी के कारण कीमत तेज

गर्मी व पानी की कमी से उत्पादन पर हुआ असर, खाड़ी देशों में निर्यात भी कम हुआ

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हरी मिर्च के उत्पादन में कमी

हरी मिर्च के उत्पादन में कमी

नवी मुंबई. खाने में अगर मिर्च का स्वाद ना हो तो खाने का मजा ही बिगड़ जाता है। यही कारण है कि बाजार में हमेशा हरी मिर्च की मांग बनी रहती है। मौजूदा समय में मिर्च की मांग के अनुपात में आपूर्ति नहीं किए जाने पर कीमत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हरी मिर्च के उत्पादन में गिरावट दर्ज होने के कारण एपीएमसी की सब्जी मंडी में मिर्च की आवक कम हो गई है। परिणाम स्वरूप हरी मिर्च जो 20 से 22 रुपए किलो की दर से बेची जा रही थी, वही गुरुवार को थोकमंडी में 50 से 60 रुपए किलो के भाव से बेची गई। फुटकर बाजार में इसका भाव 90 से 100 रुपए प्रति किलो की दर पर रहा।

पालघर से मिर्च की आवक बंद
घर एवं होटलों में हरी मिर्च का खूब उपयोग किया जाता है। होटलों की तरफ से हरी मिर्च की अधिक मांग रहती है। हरी मिर्ची की मांग को पूरा करने के लिए वाशी के थोक सब्जीमंडी में 60 से 65 गाड़ी की आवक आमतौर पर होती है। मिर्च उत्पादक क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी व पानी की कमी के कारण सिंचाई नहीं होने से मिर्ची के पौधे सूखने लगे हैं, जिसके कारण बाजार में हरी मिर्च की आवक कम हुई है। वर्तमान में हरी मिर्च की 35 से 40 गाड़ी बाजार में पहुंच रही है। मिर्च की आवक गुजरात, हुबली, कर्नाटक से होती है। पालघर से होने वाली मिर्च की आवक बंद हो गई है, इसलिए मिर्च की कमी खलने लगी है।
मिर्ची के उत्पादन में गिरावट दर्ज होने के कारण निर्यात पर भी इसका असर पड़ा है। खाड़ी देश में हरी मिर्च की ज्यादा मांग है, यूरोप और खाड़ी देशों में हर रोज 40 से 45 टन हरी मिर्च का निर्यात किया जाता है। परंतु अभी मिर्च की आवक घटने से निर्यात करना अब मुश्किल हो गया है। निर्यात में भी 30 से 40 प्रतिशत की कमी आई है।