पूर्व मंत्री के इशारे पर खाली किया खजाना, अब किसानों को ऋण बांटने के लाले

पूर्व मंत्री के इशारे पर खाली किया खजाना, अब किसानों को ऋण बांटने के लाले

Shyam Lal Choudhary | Publish: Apr, 17 2019 09:11:04 PM (IST) | Updated: Apr, 17 2019 09:11:05 PM (IST) Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

बैंक अधिकारियों ने गत वर्ष जमकर की गड़बड़ी, अब सरकार बदलते ही जांच के आदेश
- अपेक्स बैंक ने नागौर सीसीबी के एमडी व निरीक्षण करने वाली टीम को थमाया नोटिस
- राजस्थान पत्रिका ने गत वर्ष समाचार प्रकाशित कर किया था खुलासा

नागौर. नागौर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक (सीसीबी) में तत्कालीन सहकारिता मंत्री की शह पर किए गए गड़बड़झाले का अब खुलासा होने की उम्मीद जगी है। पिछले वर्ष राज्य की भाजपा समर्थित सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन सहकारिता मंत्री की शह पर बैंक प्रशासन द्वारा डेगाना विधानसभा क्षेत्र में खूब धन बरसाया था, जिसको लेकर गत वर्ष 12 अगस्त को राजस्थान पत्रिका ने समाचार प्रकाशित कर गड़बड़झाले की पोल खोली थी।

हालांकि सरकार भाजपा की होने के चलते बैंक अधिकारियों को साफ तौर पर बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रदेश में सरकार बदलते ही बैंक में किए गए गड़बड़झाले को लेकर अपेक्स बैंक ने नागौर सीसीबी एमडी व निरीक्षण करने वाले अधिकारी को नोटिस दिया है, साथ ही सहकारिता विभाग के अतिरिक्त रजिस्ट्रार को पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। उधर, बैंक द्वारा महंगी दर पर उधार लेकर सस्ती दर पर, खासकर पूर्व सहकारिता मंत्री के क्षेत्र में बांटे गए ऋण का परिणाम यह रहा है कि अब बैंक अप्रेल में शुरू हुए ऋण वितरण में नागौर के किसानों के अल्पकालीन कृषि ऋण पर संकट आ गया है।

इस तरह खुला राज
सहकारी बैंकों में सरकार की हिस्सा राशि पूरी नहीं थी। इसके चलते सहकारी बैंकों की हालत कमजोर थी। वर्तमान सरकार ने विधानसभा में घोषणा की थी कि सभी बैंकों को हिस्सा राशि दी जाएगी, ताकि उनका सीआरएआर ठीक रहे। सरकार ने सीआरएआर के लिए करीब सवा सौ करोड़ सभी सहकारी बैंकों को दिया है।
गत वर्ष बैंक में गड़बड़ी होने पर गत वित्तीय वर्ष में बैंक ने अपने कागजों में गड़बड़ी कर सीआरएआर (जोखिम भारित आस्तियों के प्रति पूंजी अनुपात) नौ प्रतिशत बताया। यह अनुपात बैंकिंग लाइसेंस के लिए जरूरी होता है। अल्पकालीन कृषि ऋण के लिए रिफाइनेंस करने से पहले नाबार्ड ने बैंक की पड़ताल की तो सामने आया कि सीआरएआर 9 प्रतिशत नहीं है। बैंक के रिकॉर्ड को गलत बताते हुए नाबार्ड ने रिफाइनेंस रोक दिया। बैंक के पास किसानों को कर्ज देने के लिए रकम नहीं थी। ऐसे में अपेक्स बैंक से इकॉनोमिक लैंडिंग रेट पर 8.65 प्रतिशत की दर से करीब 90 करोड़ रुपए लेकर किसानों को लोन बांट दिए। चौंकाने वाले तथ्य यह है कि ऊंची दर पर उधार लेकर लोन मात्र 5 प्रतिशत की दर पर बांट दे दिया। बैंक की करतूत पर निरीक्षण करने वाली अपेक्स बैंक की टीम ने भी वस्तुस्थिति सामने नहीं रखी।

किसानों के फसली ऋण पर संकट
बैंक अधिकारियों द्वारा की गई गड़बड़ी से किसानों को दिए जाने वाले फसली ऋण पर संकट आ गया है। विभाग ने सभी जिला बैंकों को एक अप्रेल से अल्पकालीन ऋण बांटने के निर्देश दिए हैं। वर्तमान स्थिति में नागौर में ये ऋण नहीं बांट सकते। ऋण के लिए आवश्यक बजट नहीं है। नाबार्ड पहले ही रिफाइनेंस रोक चुका है। अपेक्स बैंक से नागौर सीसीबी पूर्व में ही करोड़ों रुपए ले चुकी है। ऐसे में जिले के किसानों को ऋण नहीं मिलेगा।

जांच के आदेश
अपेक्स बैंक एमडी ने नागौर एमडी पीपी सिंह के साथ बैंक को निरीक्षण करने वाली अपेक्स बैंक की टीम को भी नोटिस दिया है। सकारी समितियों के रजिस्ट्रार ने अजमेर खंडीय रजिस्ट्रार को पूरे प्रकरण की जांच सौंपी है।

 

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