मिर्धा कॉलेज में कई मुद्दे वषों से नहीं हुए हल, सांसद बेनीवाल ने कहा - कॉलेज प्रशासन की ढिलाई

Many issues in Mirdha College were not resolved in years, MP Beniwal said - laxity of college administration, जिला मुख्यालय के तीनों सरकारी कॉलेज में कई मुद्दों का वर्षों से नहीं हुआ समाधान, कॉलेजों में छात्रसंघ कार्यालय का फीता काटने ही आते हैं राजनेताओं, कॉलेज प्रशासन की इच्छाशक्ति के अभाव में नहीं होता काम

By: shyam choudhary

Updated: 13 Aug 2019, 11:38 PM IST

Student union election नागौर. छात्रसंघ चुनाव नजदीक आते ही कॉलेजों में वर्षभर गायब रहने वाले छात्रनेताओं की सक्रियता बढ़ जाती है। छात्र नेता आए दिन किसी न किसी समस्या या मुद्दे को लेकर विरोध-प्रदर्शन एवं ज्ञापन देते नजर आ जाते हैं। सही कहा जाए तो कॉलेजों में चुनाव का माहौल इन्हीं छात्रनेताओं student leader की सक्रियता से ही बनता है। स्कूल की शिक्षा पूरी कर कॉलेज में प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाले छात्रों की छोटी-मोटी मदद करके उनके वोट लेने की कोशिश करते हैं और काफी हद तक सफल भी जाते हैं, लेकिन छात्रसंघ चुनाव के बाद यदि छात्रसंघ अध्यक्ष के कार्यालय का उद्घाटन समारोह छोड़ दें तो कॉलेजों में छात्र नेता कम ही नजर आते हैं। मुद्दों की बात करना तो दूर की बात है।

उधर, सांसद हनुमान बेनीवाल MP Hanuman Beniwal का कहना है कि कॉलेज प्रशासन की ढिलाई व उदासीनता से कुछ मुद्दों का समाधान वर्षों से नहीं हुआ है। बेनीवाल ने पत्रिका को बताया कि उन्होंने कॉलेज में विकास कार्यों के लिए फंड दिया, लेकिन कॉलेज ने खर्च करने की बजाय लौटा दिया, इसके बाद उन्हें ग्राम पंचायतों को एजेंसी बनाकर काम करवाना पड़ा। बेनीवाल ने कहा कि वे आज भी चार दीवारी के लिए बजट देने को तैयार है।

पिछले सात-आठ साल से जिला मुख्यालय के श्री बीआर मिर्धा राजकीय कॉलेज BR Mirdha Government College के मुद्दे हों या फिर महिला कॉलेज और विधि कॉलेज, कई मुद्दे ऐसे हैं जिनका समाधान आज तक नहीं हो पाया है। राजस्थान पत्रिका ने पिछले चुनावों में छात्रसंघ संगठन एनएसयूआई व एबीवीपी के साथ अध्यक्ष का चुनाव लडऩे वाले प्रत्याशियों द्वारा चुनाव के समय किए गए वादों एवं उनके द्वारा गए मुद्दों की हकीकत जानी तो स्थिति काफी निराशाजनक मिली। कुछ मुद्दे ऐसे हैं जो हर साल छात्र नेताओं द्वारा उठाए जाते हैं और चुनाव के बाद भूल जाते हैं।

ये हैं प्रमुख मुद्दे, जिनका वर्षों से नहीं हुआ समाधान

  • जिला मुख्यालय के बीआर मिर्धा कॉलेज व महिला कॉलेज की चार दीवारी का मुद्दा पिछले कई वर्षों से है, चार दीवारी के अभाव में अतिक्रमी जगह-जगह कब्जा जमाने का प्रयास कर रहे हैं। अतिक्रमण को लेकर दो साल पहले हुई घटना शहर आज भी नहीं भूला है।
  • जिला मुख्यालय की तीनों ही कॉलेज में व्याख्याताओं के रिक्त पद भरने की समस्या कम होने की बजाए दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। कॉलेजों में आधे से ज्यादा पद रिक्त पड़े हैं।
  • मिर्धा कॉलेज में पेयजल की समस्या पिछले कई वर्षों से है। कॉलेज में लाखों रुपए की लागत से लगाया गया आरओ प्लांट भी बंद पड़ा है।
  • एनसीसी की गल्र्स विंग शुरू करवाने की मांग पिछले काफी समय से है, बीच में दो साल अनुमति मिली, लेकिन गत वर्ष फिर छीन ली। इसके विरोध में छात्र नेताओं की भूमिका नगण्य रही।

नागौर मिर्धा कॉलेज - एनएसयूआई इन मुद्दों पर लड़ेगी चुनाव

  • महाविद्यालय में नए कैंटीन का निर्माण।
  • व्याख्याता सहित रिक्त पड़े पदों की पूर्ति।
  • महाविद्यालय में गल्र्स विंग चालू करवाना और एयर विंग चालू करवाना।
  • महाविद्यालय की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करवाना।
  • महाविद्यालय में बिजली की पुरानी फिटिंग को हटाकर नई फिटिंग करवाना और पानी की सुचारू रूप से व्यवस्था करना।
  • महाविद्यालय में पीजी में विज्ञान संकाय में भौतिक शास्त्र रसायन शास्त्र वनस्पति शास्त्र जिसे खुलवाना।
  • महाविद्यालय के चारों तरफ चारदीवारी का निर्माण करवाना।
  • महाविद्यालय में खेल का मैदान तैयार करवाना।
  • महाविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए एक हेल्प डेस्क बनवाना।
  • महाविद्यालय में एनसीसी की सीटें बढ़ाना।

एबीवीपी के ये हैं मुद्दे

  • अतिक्रमण मुक्त महाविद्यालय हो।
  • महाविद्यालय में बीसीए, बीबीए कोर्स शुरू हो।
  • महाविद्यालय में व्याख्याताओं के पद भरवाना।
  • महाविद्यालय परिसर की चारदीवारी बनवानाञ

हमने प्रयासों में कमी नहीं रखी, लेकिन कॉलेज भी दे सहयोग
मेरे पास जब-जब छात्र नेता अपनी समस्याएं एवं कॉलेज विकास के मुद्दे लेकर आए, मैंने उनको निराश नहीं किया। मैंने खींवसर विधायक रहते हुए बीआर मिर्धा कॉलेज में 10 लाख रुपए का बजट दिया है, जिससे छात्रसंघ कार्यालय का निर्माण, एक लाख रुपए का खेल सामान तथा एक लाख रुपए वाटर कूलर पर खर्च हुए हैं। जहां तक चार दीवारी की बात है तो कॉलेज प्रशासन चार दीवारी बनवाए, मैं 10 लाख रुपए देने को तैयार हूं। मुख्य बात यह है कि विधायकों व सांसद के कोष की राशि को खर्च करने में रुचि नहीं दिखाती, जिसके कारण हमें ग्राम पंचायतों को एजेंसी बनाकर काम करवाना पड़ता है। कॉलेज में व्याख्याताओं के पद जल्द ही भरवा देंगे तथा एनसीसी की गल्र्स विंग खोलने के लिए भी मैंने दिल्ली व जयपुर बात कर ली है, जल्द ही परिणाम मिलेगा।
- हनुमान बेनीवाल, सांसद, नागौर

shyam choudhary Reporting
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