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राम नाम से बड़ा कुछ भी नहीं है

Nagaur. रामपोल सत्संग भवन में प्रवचन में राम नाम की समझाई महत्ता

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There is nothing greater than the name of Ram

Sant Murliram Maharaj giving discourses at Rampol Satsang Bhawan

नागौर. रामपोल सत्संग भवन में चल रहे सत्संग में कथावाचक संत रमताराम ने कहा गोस्वामी तुलसीदास महाराज ने रामचरितमानस का लेखन करते हुए कहा कि भगवान के चरित्र तो बहुत बड़े हैं, लेकिन प्रभु के गुण का वर्ण करना बुद्धि से परे है। मेरा भाग्य तो छोटा है, लेकिन अभिलाषा भगवान रामचंद्र के चरित्र बनाने की बड़ी है। जिनका ईश्वर के चरणों में प्रेम नहीं, उनको इस कथा में कुछ नहीं मिलेगा। जिस कथा में भगवान राम का नाम का यश का वर्णन किया गया है। उस कथा में सारे ग्रंथों का सार आ जाता है। कहने का अर्थ है कि राम नाम के बिना कहीं भी रस नहीं रहता है। जीवन में राम नाम होना जरूरी है। जिस ग्रंथ में राम का वर्णन होगा। वह कथा सभी संत महात्माओं के लिए पूज्यनीय होगी। इस ग्रंथ को संत महात्मा स्वीकार कर लेंगे। अपार संसार समुंदर को पार करने के लिए राम नाम रूपी पुल पर चढकऱ आसानी से पार हो सकता है। संत मुरलीराम महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का नाम ही भवसागर को पार करा सकता है, लेकिन इसके लिए खुद को समर्पित करना पड़ेगा। भगवान की सच्चे भाव से भक्ति करनी होगी। भक्त की भक्ति इतनी प्रबल होनी चाहिए कि भगवान की कृपा उस पर बनी रहे। कहने का अर्थ है कि भक्ति के दौरान भक्त जब खुद को अपने ईष्ट के समक्ष समर्पित कर देता है तो उसके अंदर अहं भाव पूरी तरह से समाप्त हो जाता है। भक्ति में अहं का कोई स्थान नहीं है। इस अवसर पर साध्वी मोहनी बाई ने जिण दिन संत मिल जाये, भजन प्रस्तुत किया। बाल संत रामगोपाल महाराज, नंदकिशोर बजाज, नंदलाल प्रजापत, कांतिलाल कंसारा, मदन मोहन बंग, रामअवतार शर्मा आदि मौजूद थे।