scriptFarmer is not a debtor, credit rating should not be affected says Kerala High Court | लोन के इस मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, किसान नहीं कर्जदार, ना हो उनकी क्रेडिट रेटिंग प्रभावित | Patrika News

लोन के इस मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, किसान नहीं कर्जदार, ना हो उनकी क्रेडिट रेटिंग प्रभावित

locationनई दिल्लीPublished: Nov 18, 2023 10:31:22 am

Submitted by:

Shaitan Prajapat

पीआरएस योजना के तहत एक किसान को किसी भी तरह से कर्जदार नहीं माना जा सकता है चाहे ऋण इसके जारी होने से पहले लिया गया हो या बाद में।

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केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार की धान रसीद शीट (पीआरएस) योजना में भुगतान प्राप्त करने वाले किसानों को किसी भी बैंक द्वारा कर्जदार नहीं माना जा सकता और इसके आधार पर किसान की क्रेडिट रेटिंग प्रभावित नहीं हो सकती। जस्टिस देवन रामचंद्रन ने धान खरीदी का भुगतान नहीं मिलने और बैंक के रवैये से एक किसान के आत्महत्या करने की जानकारी मिलने के बाद यह स्पष्ट किया। कोर्ट ने कहा कि बैंक अभी भी किसानों के साथ कर्जदार के रूप में व्यवहार कर रहे हैं और इसका असर उनकी क्रेडिट रेटिंग पर पड़ रहा है।


किसान को किसी भी तरह से कर्जदार नहीं माना जा सकता

कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि जो किसान खरीदे गए धान के लिए सरकारी भुगतान में देरी के कारण पीआरएस सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए मजबूर हैं, इसलिए उनकी क्रेडिट रेटिंग प्रभावित नहीं होनी चाहिए। न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने कहा कि उच्च न्यायालय के पहले के फैसले में यह स्पष्ट कर दिया गया था कि पीआरएस योजना के तहत एक किसान को किसी भी तरह से कर्जदार नहीं माना जा सकता है चाहे ऋण इसके जारी होने से पहले लिया गया हो या बाद में।

ऋण नहीं मिलने के कारण किसान ने किया था सुसाइट

कोर्ट की टिप्पणियां इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि हाल में एक किसान ने सरकार द्वारा खरीदे गए धान के लिए कथित तौर पर भुगतान नहीं किए जाने के कारण अलाप्पुझा जिले के कुट्टनाड क्षेत्र में आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या करने वाले किसान प्रसाद ने यह कदम उठाने से पहले एक वीडियो बनाई थी। इसमें यह कहते हुए देखा जा सकता है कि वह जीवन में एक असफल व्यक्ति हैं और बैंक कम ‘सिबिल स्कोर’ होने के कारण उन्हें ऋण देने से इनकार कर रहे थे।

तमिलनाडु में बन रही एलजीबीटीक्यू नीति

चेन्नई। मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टनरों के बीच सिविल यूनियन को मान्यता देते हुए डीड ऑफ फैमिली एसोसिएशन को पंजीकृत करने की प्रक्रिया पर विचार करने का सुझाव दिया है। जस्टिस आनंद वेंकटेश ने एक हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई के दौरान यह सुझाव दिया। याचिकाकर्ता प्रसन्ना की मांग थी कि फैमिली डीड का उद्देश्य दो व्यक्तियों को रिश्ते में रहने का अधिकार सुनिश्चित करना है। इससे पहले, तमिलनाडु सरकार ने कोर्ट को सूचित किया था कि वह एलजीबीटीक्यू समुदाय के लिए एक नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। यह नीति बनाने वाला वह देश का पहला राज्य होगा।

रूस में चरमपंथी घोषित करने की मांग

उधर, रूसी न्याय मंत्रालय ने लजीबीटीक्यू अंतर्राष्ट्रीय आंदोलन को चरमपंथी घोषित करने के लिए देश के सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा दायर किया है। मंत्रालय ने कहा कि अधिकारियों ने रूस में सक्रिय एलजीबीटी आंदोलन में सामाजिक और धार्मिक कलह भड़काने जैसी गतिविधियों का पता लगाया है।

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