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कर्नाटक के इस मंदिर में कुरान के पाठ के साथ त्योहार मनाने की पीढ़ियों पुरानी परंपरा जारी

बेलूर के ऐतिहासिक चेन्नाकेशव मंदिर ने दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं के विरोध के बावजूद कुरान के अंशों का पाठ करने के बाद रथोत्सव को बंद करने की अपनी सदियों पुरानी परंपरा को जारी रखा। परंपरा के अनुसार, बेलूर मंदिर में त्योहार की शुरुआत को चिह्नित करने के लिए कुरान की आयतों का पाठ किया जाता है।
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नई दिल्ली

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Archana Keshri

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Updated: 14 Apr 2022, 6:13 PM IST

कर्नाटक के इस मंदिर में कुरान के पाठ के साथ त्योहार मनाने की पीढ़ियों परंपरा जारी

कर्नाटक के इस मंदिर में कुरान के पाठ के साथ त्योहार मनाने की पीढ़ियों परंपरा जारी

आज के समय में जब देश हिजाब, या हलाल मांस या यहां तक कि रामनवमी पर राज्यों में भड़की हिंसा को लेकर सांप्रदायिक कलह देख रहा है, यहां दो उदाहरण हैं जो देश की धर्मनिरपेक्ष साख में हमारे विश्वास को फिर से लागू करते हैं। तो वहीं कर्नाटक में एक मंदिर ने कुरान के अंश पढ़ने के बाद अपना रथ उत्सव शुरू किया, वहीं केरल में एक अन्य मंदिर ने मुस्लिम समुदाय के लिए इफ्तार रात्रिभोज का आयोजन किया। और इफ्तार में सिर्फ मुसलमान ही नहीं, बल्कि इलाके में रहने वाले हिंदू भी शामिल हुए।

हासन जिले में स्थित बेलूर के ऐतिहासिक चेन्नाकेशव मंदिर ने दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं के विरोध के बावजूद कुरान के अंशों का पाठ करने के बाद रथोत्सव (कार उत्सव) को बंद करने की अपनी सदियों पुरानी परंपरा को जारी रखा। राज्य के बंदोबस्ती विभाग ने बुधवार को मंदिर प्रशासन को अभ्यास शुरू करने की अनुमति दे दी। वार्षिक उत्सव बुधवार को जिला पुलिस की कड़ी निगरानी में शुरू हुआ। दो दिवसीय कार उत्सव को देखने के लिए राज्य भर से सैकड़ों लोग चेन्नाकेशव मंदिर पहुंचे।

परंपरा के अनुसार, बेलूर मंदिर में त्योहार की शुरुआत को चिह्नित करने के लिए कुरान की आयतों का पाठ किया जाता है। एक मौलवी आमतौर पर भगवान चेन्नाकेशव के रथ के सामने कुरान के अंश पढ़ता है। तो वहीं परंपरा के बारे में बात करते हुए, एक अधिकारी ने कहा कि "लंबे समय से, कुरान के अंश पढ़ने की परंपरा रही है जिसका पालन किया जाता है।"

उन्होंने कहा कि इस साल कुछ भ्रम था क्योंकि मंदिर के अधिकारियों ने मुस्लिम व्यापारियों को वार्षिक उत्सव में स्टॉल लगाने से रोकने के लिए एक नोटिस जारी किया था। उन्होंने साझा किया कि मंदिर को परंपरा के साथ जारी रखने की अनुमति देने से पहले बंदोबस्ती विभाग ने विभिन्न पुजारियों से परामर्श किया।

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मंदिर के प्रशासक ने मुजराई विभाग को पत्र लिखकर अनुष्ठान की निरंतरता पर स्पष्टीकरण मांगा था, जो वर्षों से चल रहा है और हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। मुजराई विभाग की आयुक्त रोहिणी सिंधुरी ने अनुष्ठान जारी रखने को हरी झंडी दे दी। उन्होंने कहा कि हिंदू धार्मिक अधिनियम, 2002 की धारा 58 के अनुसार मंदिर के रीति-रिवाजों और परंपराओं में कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। उनके निर्देश के बाद, मंदिर समिति ने कुरान से छंदों के पाठ की रस्म को आगे बढ़ाने का फैसला किया।

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