किसानो की हालत खराबः प्याज़ 50 पैसे प्रति किलो और लहसुन 2 रुपये प्रति किलो बिका

किसानो की हालत खराबः प्याज़ 50 पैसे प्रति किलो और लहसुन 2 रुपये प्रति किलो बिका

Faiz Mubarak | Publish: Dec, 06 2018 04:36:09 PM (IST) Neemuch, Neemuch, Madhya Pradesh, India

किसानो की हालत खराबः प्याज़ 50 पैसे प्रति किलो और लहसुन 2 रुपये प्रति किलो बिका

नीमच: मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी सीमांत मंडी मानी जाने वाली मंडी में किसानो का आक्रोश देखने को मिला। इसके पीछे कारण था प्याज की नीलामी का भाव पचास पैसे प्रति किलोग्राम और लहसुन की नीलामी का भाव दो रुपये प्रति किलोग्राम होना। इतने कम दाम होने पर किसानो द्वारा खेत में बोए गए बीज का भाव भी नहीं मिल पा रहा था, तो फिर तुड़वाई की मज़दूरी, मंडी तक लाने की लागत और मुनाफा तो दूर की बात है। ऐसे में ज्यादातर नाराज़ किसान या तो अपनी फसल वापस ले जाने को मजबूर हुए या फिर ढुलाई, मज़दूरी देने में असमर्थ किसान मंडी में ही अपनी फसल छोड़कर चले गए।

मंडी सचिव की बात

इधर मंडी सचिव का कहना है कि, फसल के दामों में भारी गिरावट आई है। इसका बड़ा कारण माल की अधिक आवक है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि, माल की गुणवत्ता में भी कमी होने के कारण कुछ चीजों के दामों में गिरावट आई है। उनका कहना है कि, अगर किसान बेहतर गुणवत्ता का माल लाएं तो उन्हें उसके अच्छे दाम भी मिलेंगे। मंडी सचिव ने कहा कि, ‘सोमवार को प्याज के दाम 90 रुपये से 900 रुपये प्रति क्विंटल थे। ऐसे ही, लहसुन के दाम 200 रुपये से 3900 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहे। प्याज और लहसुन की कुछ मात्रा कम दामों पर बेची गई।’

किसानो ने सुनाई आपबीती

वहीं मंडी में अपनी फसल बेचने आए एक किसान ने बताया कि, जब वह अपनी प्याज की फसल बेचने मंडी आया तो उसकी फसल का दाम 50 पैसे प्रति किलोग्राम लगाया गया। उसका कहना था कि, वह बड़ी मशक्कत के साथ 15 क्विंटल प्याज लेकर नीमच मंडी आया था। किसान के अनुसार, उसने सोचा था कि, माल बेचकर घर की ज़रूरत का सामान लेकर जाएगा लेकिन यहां उसकी प्याज़ का भाव मात्र 50 पैसे प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जा रहा है। ऐसे में अब उसके पास इतने पैसे नहीं हैं कि, वह अपनी प्याज़ को वापस भी ले जा सके और अगर ले भी जाता है तो उसे सुरक्षित रख सके। साथ ही उसने कहा कि, मंडी के दाम सुनकर वह काफी आहत है इसलिए अब वह अपना पूरा माल मंडी में ही छोड़कर जाने को मजबूर है। एक अन्य किसान ने बताया कि, वह अपना माल गांव ले जाने को मजबूर है, वहां ले जाकर अपनी फसल मवेशियों को ही खिला देगा।’

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