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टैबलेट लेकर गांवों को निकले गाय-भैंस का आधार बनाने वाले..लेकिन है एक बड़ी मुश्किल भी

आखिर कैसे लगाएंगे मवेशियों के कानों में ये पीले रंग के खास टैग

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Rajkumar Pal

Jan 04, 2017

aadhaar of cow

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नोएडा। नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा भेजे गए एक लाख हजार टेक्नीशियन देशभर के गांवों-गांवों में जाने के लिए निकल पड़े हैं। हाथों में टैबलेट होगा। बैग में कुछ औजार। साथ में सबसे खास सामान यानि टैग। वो आपके मवेशियों को पुचकारेंगे। थपथपाएंगे। कानों में टैग लगाने के लिए मनाएंगे। अगर गाय-भैंस बिदक गईं तो बेचारों के लिए वाकई खड़ी हो जाएगी बड़ी मुश्किल।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है आने की तैयारी

बहुत जल्दी ये पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के तमाम गांवों में दस्तक देंगे। अगर आपके पास गाय भैंस हैं तो यकीनन वो आपके पास भी पहुंचेंगे। आपके मवेशियों की फोटो खींचेंगे। उनकी विवरण आपसे लेंगे। उसके बदले आपको दे जाएंगे आपके मवेशियों के आधार कार्ड। ये आधार बड़े काम की चीज होगा, इससे आपके मवेशियों की हेल्थ पर भी नजर रखी जाएगी और डाटा बेस भी। वर्ष 2012 के मवेशी सर्वे के अनुसार उत्तर प्रदेश में 6.87 करोड़ गाय भैंस हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश में इनकी संख्या अंदाजन एक करोड़ के आसपास होगी।

कैसे मिलेगा आधार

इस आधार के लिए वो आपकी गाय भैंसों को लाइन में लगाकर कतई इंतजार नहीं कराने वाले। बल्कि गांवों में आने वाला टैक्नीशियन खुद हर उस घर में पहुंचेगा, जहां पर गाय या भैंसे हैं। वो आपके हर मवेशी का 12 अंकों का खास आधार आईडी जेनरेट करेंगे। लेकिन ये इतना आसान नहीं होने वाला। उनके बैग में एक पीले रंग का छोटा सा टैग होगा, जिसे वो आपकी गाय या भैंस के कान में लगाएंगे। यही सबसे मुश्किल काम होगा। अपने औजारों की मदद से वो इस टैग को कानों में फिट करेंगे। हां, अगर आपकी गाय भैंस को उनका कान छूने का तरीका पसंद नहीं आया तो जरूर उनके सामने समस्या खड़ी हो सकती है। हां साथ साथ आपकी गाय भैंस की फोटो भी खींची जाएगी।

क्या है ये पीले रंग का टैग

ये पीले रंग का टैग ही दरअसल मवेशियों के आधार का काम करेगा। ये एक तरह की चिप होगी। जिससे आपके मवेशी पर हर तरह की नजर रखी जाएगी। ये आठ ग्राम का होगा। अगर ये सोच रहे हों कि ये तो निकाला भी जा सकता है तो आप भूल कर रहे हैं, ऐसा कतई नहीं होने वाला। कम से कम आधार डिपार्टमेंट का तो यही कहना है। ये सालों साल चलता रहेगा। जब तक ये चलेगा तब तक आपके मवेशी का डेटाबेस भी तैयार होता रहेगा। इसी आधार के जरिए मवेशी की चिकित्सा में मदद, दुग्ध उत्पादन में बढोतरी, सीरम आदि पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा। टैगिंग के बाद आधार के 12 अंकों के यूनिक आईडी वाला एक हेल्थ कार्ड भी मवेशी मालिक को दिया जाएगा।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मवेशी बिजनौर में

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मवेशी बुलंदशहर में हैं, वहां 16 लाख 96 हजार 151 मवेशी हैं। सबसे कम मवेशी गौतमबुधनगर में हैं, उनकी संख्या 369051 है। वर्ष 2012 के मवेशी सर्वे के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में मवेशियों की संख्या इस तरह है-

बागपत 555619
बिजनौर 1143739
बुलंदशहर 1696151
गौतमबुधनगर 369051
गाजियाबाद 399243
हापुड़ 416312
मेरठ 914595
मुरादाबाद 944408
मुजफ्फरनगर 84476
रामपुर 749123
सहारनपुर 1048145
संभल 896410
शामली 436139