
शहर के एक विवाह स्थल के बाहर जूठन खाती गाये।
स्वच्छता की रैंकिंग में पिछड़ने के बावजूद नगर परिषद के कार्मिकों ने आंखें मूंद रखी है। शहर में हर गली-मोहल्ले में कचरे के ढेर लगे है, लेकिन उनको उठाने वाला नहीं है। शहर में भले ही घर-घर कचरा संग्रहण करने के लिए लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन उसका निस्तारण करने के बजाय कचरा मनमर्जी के डम्पिंग यार्ड और गड्ढों में डालकर इतिश्री कर ली जाती है। शहर में बने विवाह स्थलों से भी सफाई के नाम पर राशि वसूली जाती है, लेकिन वहां कार्यक्रम होने पर उसके आस-पास ही जूठन व गंदगी डाल दी जाती है। हालात यह है कि कई विवाह स्थलों से जूठन व बची हुई भोजन सामग्री के साथ प्लास्टिक के प्रतिबंधित गिलास आदि भी सड़कों के किनारे ही डाल दिए जाते है।
गलियों की सफाई तक समय पर नहीं
शहर में कई क्षेत्रों में सड़कों व नालियों की सफाई भी समय पर नहीं की जा रही है। शहर के चादरवाला बालाजी मार्ग, रामनगर, सिंधी कॉलोनी, आशापुरा नगर, दुर्गा कॉलोनी, पानी दरवाजा, नाडी मोहल्ला, सुंदर नगर, रजत विहार, सोसायटी नगर, शिवाजी नगर, राजेन्द्र नगर, हाउसिंग बोर्ड सहित आदि कई कॉलोनियों में सफाईकर्मी समय पर नहीं आते। आते है तो गलियों को साफ कर वहां का कचरा मोहल्लों के पास ही सड़क किनारे या अन्य जगहों पर डाल देते है। जिसे चार-पांच दिन तक उठाया तक नहीं जाता है।
विचरते हैं मवेशी
इन दिनों विवाहोत्सवों की धूम है। ऐसे में कई विवाह स्थलों के बाहर डाली जा रही जूठन खाने के लिए मवेशी विचरते रहते है। जिनके झगड़ने पर वे कई बार सड़कों पर आते हैं और लोग घायल हो जाते है। जूठन के कारण बदबू फैली रहती है। प्रतिबंधित प्लास्टिक की सामग्री जगह-जगह बिखरी होने से वह गाय व अन्य मवेशी खा जाते हैं। जिनसे उनकी भी कई बार जान पर बन आती है। इसके बावजूद नगर परिषद की ओर से सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
Updated on:
05 Feb 2024 04:30 pm
Published on:
05 Feb 2024 04:30 pm
